
वक़्त कल तुमसे हिसाब मांगेगा
सुलगते सवालों का जवाब मांगेगा

क्यों बैचैन हो गया है बचपन
क्यों है जवानों के चहरे पर उलझन

क्यों खनकते नहीं बाँहों में कंगना
क्यों पलाश फूलते नहीं अंगना

क्यों हो रहा है हर तरफ भेदभाव
क्यों है भाई का भाई से मनमुटाव

क्यों किसान आत्महत्या कर रहा है
क्यों आदमी - आदमी से डर रहा है

क्यों हर तरफ आतंक का शोर है
क्यों वैर नफरत चहुँ ओर है .

क्यों आज हर फिजा वीरान है
क्यों धरती बनी शमशान है
क्यों सत्ता के लिए लड़ी जा रही है जंग
क्यों है आदमी का आदमी से , मोहभंग

क्यों आज हर तरफ हवा जहरीली है
क्यों प्रकृति में आई यह तबदीली है

क्यों इंसान भूख से मर रहे हैं
क्यों गरीब के सपने बिखर रहे हैं

क्यों बेटियाँ जलाई जा रहीं हैं
क्यों विधवाएं तडपायी जा रहीं हैं

क्यों क़ानून हमारे कमजोर हैं
क्यों भ्रष्टाचार फैला पुरजोर है

अगली पीढ़ी तुमसे मांग रही है हिसाब
क्या तुम दे सकोगे ऐसे सवालों के जबाब ?