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शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

ब्रह्मांड दूरियों का….!

सरोकार छूट जाऐं

बंधन टूट जाऐं

रस्ते बदल जाते हैं

रिश्ते रूठ जाते हैं

जैसे......!

दो बिन्दुओं का योग

सरल रेखा बनता है

लेकिन एक ही बिंदु से

निकलकर भी

मुंह मोड़कर

एक दूजे से

दो दूर जाती हुई

सरल रेखाओं के बीच

विस्तृत होता जाता है

एक अनंत विस्तार

जो रच ही देता है

एक न एक दिन

ब्रह्मांड दूरियों का….!

बुधवार, 13 मई 2015

जीवन पथ ...

हर सुबह के इंतज़ार में 
अंधियारे से लड़ना है
हर पल घटती सांसें हैं
पल को जीभर जीना है
हर रिश्ते हर नाते को
राख यही हो जाना है
झूठे जग का मोह त्याग
उस पार अकेले जाना है ....
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भीड़ चहूँ ओर है
हर तरफ शोर है
रिश्तों के मेले हैं
अपनो के रेले हैं
दुनिया के खेले हैं
फिर भी अकेले हैं... 




शनिवार, 3 सितंबर 2011

वक़्त... संध्या शर्मा





वक़्त के साथ
सब कुछ बदल जाता है
दुनिया, अपने, भावनाएं
और रिश्ते

वक़्त के साथ
बदल जाता है
वर्तमान भविष्य में
और भविष्य बन जाता है भूत

वक़्त के साथ
गुम हो जाते हैं
दुनिया में अपने
अपनों में भावनाएं
और बदल जाते है रिश्ते...