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शुक्रवार, 6 मार्च 2026

हर एक सफर की कहानी लिखो... संध्या शर्मा

हर एक सफर की कहानी लिखो,
दिल की धड़कनों की रवानी लिखो।

रास्तों में बिखरी है गुलों की महक,
बाद-ए-सबा की मेहरबानी लिखो।

कैसे मिलते हैं लोग कहीं दूर पर,
उस ताज़ा घड़ी की निशानी लिखो।

एक ख़त था जो अब बन गया दास्ताँ,
उस महबूब की सादा-जुबानी लिखो।

सोचती हूँ ये आँखें नम क्यों हुई,
उस दर्द की सच्ची बयानी लिखो।

शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

मोड़.... संध्या शर्मा

सुना है नहीं रहेगा
गली के कोने का
बिजली का खंभा
जिससे टिककर खड़ी
अपलक निहारती थी माँ
ससुराल जाते हुए मुझे
जब तक गली का
मोड़ ना आ जाए
मैं अब भी देखती हूँ उसे
हर बार आते वक़्त
तब तक.....
जब तक!!
मोड़ ना आ जाये
जबकि अब माँ
उससे टिकी नहीं होती
आज जाने मुझे
क्यों ऐसा लग रहा है
जैसे मुझसे मेरा कोई
अपना बिछड़ रहा है
कितने खुश हैं लोग
रास्ते का...!
चौड़ीकरण हो रहा है....