अंगना रंगोली सजाकर
घर का कोना -कोना
स्नेह से महकाकर
रसोई के सारे काम
जल्दी से निबटाकर
सोलह सिंगार कर
अक्षत, चन्दन, फूल
केसर, कुमकुम से
संध्या की मधुर बेला
पुकारूंगी तुम्हे चाँद
जब पलकें बिछाए
करुँगी साथ उनके
तुम्हारा भी इंतजार
बादलों की ओट में
चुपके से छिप जाओगे
कुछ पल सताओगे
तुम भी जानते हो
मेरे का मन का हाल
क्योंकि उनकी तरह
तुम्हे भी है मेरा ख्याल
लेकिन जानती हूँ मैं
हौले से मुस्कुराकर
आ ही जाओगे तुम ....
सौभाग्य और ऐश्वर्य के पर्व 'करवा चौथ' की हार्दिक शुभकामनाएं ....





