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सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

आ जाओ चाँद... संध्या शर्मा

उषा की लाली संग 
अंगना रंगोली सजाकर 
घर का कोना -कोना 
स्नेह से महकाकर 
रसोई के सारे काम 
जल्दी से निबटाकर 
सोलह सिंगार कर
अक्षत, चन्दन, फूल
केसर, कुमकुम से 
भरी थाल सजाकर
संध्या की मधुर बेला 
पुकारूंगी तुम्हे चाँद
जब पलकें बिछाए 
करुँगी साथ उनके 
तुम्हारा भी इंतजार 
बादलों  की ओट में 
चुपके से छिप जाओगे   
लजाओगे शरमाओगे 
कुछ पल  सताओगे 
तुम भी जानते हो 
मेरे का मन का हाल  
क्योंकि उनकी तरह
तुम्हे भी है मेरा ख्याल
लेकिन जानती हूँ मैं
हौले से मुस्कुराकर 
आ ही जाओगे तुम ....
 
 सौभाग्य और ऐश्वर्य के पर्व 'करवा चौथ' की हार्दिक शुभकामनाएं ....

रविवार, 22 अप्रैल 2012

देहरी का दीया .... संध्या शर्मा


मैं...
सुबह सबेरे
द्वार पर
रंगोली सजाती
कभी चाँद सी
रोटियां गढ़ती
कभी बर्तनों से बतियाती
बिता देती हूँ सारा दिन
उलझी रहती हूँ
दिन भर
चौके- चूल्हे में
बिन संवरी 
उलझी लटें लेकर
फिर भी....!
साँझ ढले
जाग उठता है
देहरी का दीया 
मुझे देखकर....!