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शनिवार, 1 मार्च 2014

अन्नदाता की पुकार ....

"इश्क, मोहब्बत, व्यापार हो या हो कोई सरकार  
पेट में जब तक पड़े न रोटी, सब कुछ है बेकार!!!"

असमय बारिश
आंधी तूफ़ान
रूठ गया क्यों
इनसे भगवान
जस का तस
इनका दर्द
बढ़ता जाता
क़र्ज़ का मर्ज़
गीली आखें
पोंछ रहा
चुपचाप खड़ा
देख रहा
पानी में मिलते
खून पसीने से सिंचे
खेत - खलिहान
हलाकान- परेशान
कोई है जो सुने.... ?
धरती का कर्ज चुकाते
कृषि-प्रधान देश के
इन किसानो की
दु:ख-भरी दास्तान ...!!!

बुधवार, 19 सितंबर 2012

द्वितीयोनास्ति... संध्या शर्मा

हम सभी
मानते, कहते आये हैं
कण-कण में, तनमन में
भगवान है...
बिना किसी खोज
बिना किसी तर्क के
आँखों से देखा नहीं
सुनाई नहीं देता
स्पर्श तो दूर की बात है
गुण गंध से अनजान
तब भी....
कहीं तो है
कोई तो है
क्या है उसका नाम
'ग़ॉड पार्टिकल' कहें
या 'हिंग्ज़ बोसान'
नामहीन, गुणहीन
किसी भी नाम से पुकारो
डॉक्टर भी इलाज करते कहते हैं
उपचार करने वाला मैं हूँ
ठीक करने वाला वही है
प्रयत्नकर्ता हम है
यशदाता कोई और है
उसमें हममें बस भेद यही,
हम नर हैं वह नारायण
कुछ भी कर लो निर्माण
पर कैसे डालोगे प्राण...?