"एक ऐसी भी घडी आएगी,जिस्म से रूह बिछड़ जाएगी...
न कोई रुत न बहारें होंगी,
चांदनी रात भी दिल जलाएगी,
अब न कोई भी रौशनी होगी,
दिए से बाती भी बिछड़ जाएगी,
न कोई ख्वाहिश न तमन्ना होगी,
ना कोई याद ही सताएगी...
एक ऐसी भी घडी आएगी,
जिस्म से रूह बिछड़ जाएगी"