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रविवार, 19 दिसंबर 2010

"DURGHATNA"

आज सुबह जैसे ही अखबार पर नज़र गई,
समाचार पढ़कर ही रूह कांप गई,
लिखा था .....
दुर्घटनाग्रस्त युवक तीन घंटे तक राह में पड़ा रहा, 
पुलिस व जनता सिर्फ देखती रही,
"क्या हो गया है, इंसानियत को,
कहाँ खो गई है मानवता,
गर वक़्त पर ईलाज हो  जाता,
तो शायद वह बच जाता,
भगवान न करे कहीं ऐसा होता,
वो तुम्हारा कोई अपना होता ........... "