"बीत गई सो बात गई"
भरोसा न करना
इस कथनी पर
सिर्फ धोखा है
भूतकाल निश्चित
वर्तमान अनिश्चित
भविष्य में क्या होगा
न तुम जानो न हम
जीवन समन्दर किनारे बने
वर्तमान रुपी रेत के टीले को
भविष्य रुपी एक लहर
पल में बदल देगी
समतल मैदान में
कैसे सुरक्षित रखोगे
अपने आप को
इस लहर के आवेग से?
एक दिन.... !
तुम्हे भी भूत होना है
स्थायित्व पाना है...?
वर्तमान के धरातल पर
मजबूती से खड़े होकर
भूतकाल से सीख लेकर
भविष्य की ओर
आशा से निहारो...!