एक दिन लक्ष्मी जी के प्रिय उल्लू को जाने क्या हुआ
रूठे-रूठे से लग रहे थे
लक्ष्मी जी ने पूछा
क्या हुआ क्यों उदास हो ?
आज इतने चुप से क्यों हो ?
इतना सुनना था कि
फूट पड़ा उनका गुस्सा
बोले...
गरुड़, मूषक, सिंह सबकी पूजा होती है
सभी कितने खुशनसीब हैं
मैं भी तो आपका वाहन हूँ
और इतना आज्ञाकारी हूँ
फिर मेरे साथ ये अन्याय क्यों ?
लक्ष्मी जी मुस्कराईं
उन्हें प्यार से समझाते हुए बोलीं
ठीक है उदास क्यों होते हो
साल में एक दिन तुम्हे भी देती हूँ
दीपावली से ठीक ग्यारह दिन पहले का दिन
तुम भी पूजे जाओगे उस दिन
पर बदले में अपने प्रिय को उपहार देने होंगे
उनकी हर बात माननी होगी
उल्लूजी ठहरे आज्ञाकारी
तुरंत मान गए
बहुत खुश हो गए
और देखिये
आज तक पूजे जाते हैं
हर करवा चौथ के दिन....
रूठे-रूठे से लग रहे थे
लक्ष्मी जी ने पूछा
क्या हुआ क्यों उदास हो ?
आज इतने चुप से क्यों हो ?
इतना सुनना था कि
फूट पड़ा उनका गुस्सा
बोले...
गरुड़, मूषक, सिंह सबकी पूजा होती है
सभी कितने खुशनसीब हैं
मैं भी तो आपका वाहन हूँ
और इतना आज्ञाकारी हूँ
फिर मेरे साथ ये अन्याय क्यों ?
लक्ष्मी जी मुस्कराईं
उन्हें प्यार से समझाते हुए बोलीं
ठीक है उदास क्यों होते हो
साल में एक दिन तुम्हे भी देती हूँ
दीपावली से ठीक ग्यारह दिन पहले का दिन
तुम भी पूजे जाओगे उस दिन
पर बदले में अपने प्रिय को उपहार देने होंगे
उनकी हर बात माननी होगी
उल्लूजी ठहरे आज्ञाकारी
तुरंत मान गए
बहुत खुश हो गए
और देखिये
आज तक पूजे जाते हैं
हर करवा चौथ के दिन....
