हे री सखी बसंत है आयो
झूमे लीम लीम की डारी, बरगद है हरियायो
गेंदा संग चमेली फ़ूली, रंग चहूं दिसि छायो।
हे री सखी बसंत है आयो।
हिय जली आग लगन की, जब उन बिसरायो
काग मुंडेर पे बैठ के बोलो, पिय संदेशा लायो।
हे री सखी बसंत है आयो।
मोरे आंगन की खिलगी क्यारी न्यारी प्यारी
जब परदेश की खबरिया कारो कागा लायो
हे री सखी बसंत है आयो।
नार - कचनार हुलसी, हुलस- हुलस सतायो
दूर देश में हमार बलम, यहाँ बसंत तू आयो
हे री सखी बसंत है आयो।
चलो बांध लो गांठ प्रीत की आम बौर गदरायो
बाट बटोही की देखे पलास बसंत अगन लगायो
हे री सखी बसंत है आयो।
