बंद मुट्ठी में लिए बैठा है,
सपने, अपने और
और पीपल की घनी छाँव
नहीं समझे ना...
समझ भी नहीं सकोगे कभी
तुम्ही तो छोड़ आये थे
बेच आये थे उसे
अपनी सोने सी धरती
मिट्टी के मोल
नहीं तोड़ सका
नाता जीवन भर का
ना ही उसे भुला पाया
इसलिए अपना सब कुछ
मुट्ठी में समेट लाया....!