तुम्हारी कविता में
खुश्बू है, फूल हैं
पत्तियां, टहनी भी
एक माली है
जो करीने से संवारता है
शब्दों के नन्हे पौधे
देता है भावों की खाद
उखाड़ फेंकता है
अनचाहे विचारों की
खरपतवार...
निदाई, गुड़ाई करता है
ताकि पनप सकें
उम्मीदों की लतायें
और रखवाली भी करता है
कि कभी कोई तोड़ न ले
अधखिली कलियां कहीं
तुम्हारी कविता एक बगिया है
सतरंगी सपनों के फूलों से भरी ...