राह न मिली खुशियों की तो क्या/ देखो न ये पगडंडियाँ भी वहीँ तक जाती हैं चुन लेंगे कोई एक सोंधी सोंधी माटी की खुश्बू से महकती नन्ही-नन्ही झाड़ियों से भरी पगडंडी गुनगुनाते हुए कोई प्यारा सा भूला बिसरा गीत बढ़ते कदम पहुँच ही जायेंगे खुशियों तक पगडंडी ही कल का महामार्ग है.......