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रविवार, 20 अक्टूबर 2013

एक प्रश्न....


ईंट - पत्थरों ने
मुझसे एक प्रश्न किया
यही है तुम्हारी जात ?
यही है तुम्हारा धर्म ?
तुम जैसे जीवों से
हम निर्जीव भले?
बिना भेद-भाव के
पड़े रहते हैं राह में
जीवन भर खुद को घिसते
राह पर बिछकर
सबको सहारा देते
अपने ईमान पर अडिग
आज तक खोजती हूँ
उस प्रश्न का उत्तर
शायद मिल जाए कहीं
मिलेगा एक दिन
इसी आशा से....