लघु कथा-1
दो निवाले सुख के
उन्हें
रिटायर हुए एक बरस भी न हुआ था कि पत्नी साथ छोड़ गई, जमा पूंजी का कुछ
हिस्सा उसके इलाज़ में और बाकी बेटों ने मजबूरियां, तकलीफें बताकर हथिया ली.
आसरे के लिए रह गए तो सिर्फ पेंशन के गिने चुने पैसे. आजकल बहुओं को
उन्हें दो वक़्त की रोटी खिलाना भी भारी पड़ने लगा है, हालत के मारे क्या
करते आखिर उन्होंने खोज लिया "दोन घास सुखाचे" का मार्ग अर्थात सुख के दो
निवाले पाने का स्थान एक छोटा सा होटल जो उनकी हैसियत के हिसाब से पेट भरने
के लिए काफी है . कैसी विडम्बना है एक समय था जब उनकी आवभगत में पूरा
परिवार लगा रहता था।
लघु कथा - 2
दो बोल प्रेम के
बहु
के पीछे-पीछे घूमते सुभद्रा कई दिनों से देख रही थी, वह धीरे-धीरे बहु को न
जाने क्या कहती. कुछ इस तरह जैसे कोई छोटी बच्ची अपनी माँ से कुछ चाहती
हो. आखिर क्या बात हो सकती है? सबकुछ तो है इनके पास, पति की पेंशन मिलती
है, वक़्त पर खाना, सोना सारी सुविधाएँ हैं. आखिरी एक दिन मैंने सुन ली उनकी
वह बात.। कह रही थी "मैं बहुत अकेली हूँ, ऐसा लगता है मुझे कुछ हो जायेगा,
लेकिन जब तू मुझसे बात कर लेती है न तो मेरी सारी तकलीफ दूर हो जाती है,
बहुत ख़ुशी मिलती है मुझे... तू माझ्या शी बोल न ग... बोल न...फ़क्त "दोन बोल
प्रेमाचे"
दो निवाले सुख के
उन्हें
रिटायर हुए एक बरस भी न हुआ था कि पत्नी साथ छोड़ गई, जमा पूंजी का कुछ
हिस्सा उसके इलाज़ में और बाकी बेटों ने मजबूरियां, तकलीफें बताकर हथिया ली.
आसरे के लिए रह गए तो सिर्फ पेंशन के गिने चुने पैसे. आजकल बहुओं को
उन्हें दो वक़्त की रोटी खिलाना भी भारी पड़ने लगा है, हालत के मारे क्या
करते आखिर उन्होंने खोज लिया "दोन घास सुखाचे" का मार्ग अर्थात सुख के दो
निवाले पाने का स्थान एक छोटा सा होटल जो उनकी हैसियत के हिसाब से पेट भरने
के लिए काफी है . कैसी विडम्बना है एक समय था जब उनकी आवभगत में पूरा
परिवार लगा रहता था।
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लघु कथा - 2
दो बोल प्रेम के
बहु
के पीछे-पीछे घूमते सुभद्रा कई दिनों से देख रही थी, वह धीरे-धीरे बहु को न
जाने क्या कहती. कुछ इस तरह जैसे कोई छोटी बच्ची अपनी माँ से कुछ चाहती
हो. आखिर क्या बात हो सकती है? सबकुछ तो है इनके पास, पति की पेंशन मिलती
है, वक़्त पर खाना, सोना सारी सुविधाएँ हैं. आखिरी एक दिन मैंने सुन ली उनकी
वह बात.। कह रही थी "मैं बहुत अकेली हूँ, ऐसा लगता है मुझे कुछ हो जायेगा,
लेकिन जब तू मुझसे बात कर लेती है न तो मेरी सारी तकलीफ दूर हो जाती है,
बहुत ख़ुशी मिलती है मुझे... तू माझ्या शी बोल न ग... बोल न...फ़क्त "दोन बोल
प्रेमाचे"
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