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दास्तान
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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015
मुश्किल है बहुत मुश्किल ...
ज़िन्दगी अपनी
दास्तान अपनी
अदालत अपनी
अपने मुक़दमे
पैरवी अपनी
वादे, यादें
ख्याल, तजुर्बे
वक्त के बदलाव से
सब बदल जाते हैं
मुंसिफ बनकर
कोई फैसला देना
मुश्किल है
बहुत मुश्किल ...
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