जुगनु सा है जीवन मेरा
क्षण में बुझती जलती हूँ
मन भर प्रकाश फ़ैलाने
नित जोत सी जलती हूँ
सूरज ढलता पश्चिम में
मै चौबारे पर ढलती हूँ
हूं माटी का एक घरोंदा
नश्वर जग की राही हूँ
नही रही चाह महल की
सिर्फ़ तेरी चाहत चाही हूँ
सूरज ढलता पश्चिम में
मै चौबारे पर ढलती हूँ
जुगनु सा है जीवन मेरा
क्षण में बुझती जलती हूँ
तन्हाई में बैठ अकेले
बीज प्यार के बोती हूँ
कैसे गाऊँ गीत सुहाने
सूली सेज पे सोती हूँ
नियति यही रही मेरी
धरती जैसे चलती हूँ
मन भर प्रकाश फ़ैलाने
नित जोत सी जलती हूँ
हरा भरा प्रीत का झरना
बहे सुवास अमराई में
कांटे चुन लूं राह के तेरी
संग हूँ जग की लड़ाई में
दिवस ढलता चंदा ढलता
मै यामिनी सी जगती हूँ
नियति यही रही मेरी
धरती जैसे चलती हूँ
