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सोमवार, 30 जुलाई 2012

खासियत हमारी...संध्या शर्मा



जीने की चाहत ना मरने की फुर्सत,
गुजरेगी कैसे ज़िन्दगानी हमारी.
 
अदावत किसी से ना कोई गिला,
है बस यही एक खासियत हमारी.

भला न किया तो बुरा भी ना करना,
सिखाती है हमको तरबियत हमारी.

बहुत फर्क है फिर भी है एक जैसी,
ना पूछो हमीं से वल्दियत हमारी.

मेरे पास ए ज़िंदगी अपना क्या है,
एक सांस थी अब रही ना हमारी.

शिद्दतों सहेजे हैं ग़म हमने अपने,
हमीं जानते हैं असलियत हमारी.

 हम क्या करेंगे हसरत किसी की,
हम को तो दरकार नहीं खुद हमारी.