हम कोई पंछी नहीं
जो फुदकते रहे
डाल-डाल पर
चहकते फिरें
हर मुंडेर पर
चंद दानो के लिए
हम धर्मराज नहीं
जो फंस जाये
चक्रव्यूह में
और प्रतीक्षा करे
अभिमन्यु की
व्यूह भेदन के लिए
हम कोई चारण नहीं
जाएँ राजसभा में
गाएं विरदावली
ढोल बजाते हुए
किसी की शान में
तनिक कृपा के लिए
हम तो पत्थर हैं
उस नींव का
जो हिला दे
एक ही पल में
पूरी मंजिल को
अधिकार के लिए
जो फुदकते रहे
डाल-डाल पर
चहकते फिरें
हर मुंडेर पर
चंद दानो के लिए
हम धर्मराज नहीं
जो फंस जाये
चक्रव्यूह में
और प्रतीक्षा करे
अभिमन्यु की
व्यूह भेदन के लिए
हम कोई चारण नहीं
जाएँ राजसभा में
गाएं विरदावली
ढोल बजाते हुए
किसी की शान में
तनिक कृपा के लिए
हम तो पत्थर हैं
उस नींव का
जो हिला दे
एक ही पल में
पूरी मंजिल को
अधिकार के लिए