चाहते हो ??? बगुलों के बीच नीर-क्षीर विवेकी हंस होना ग्रहों से परिक्रमित होते प्रकाशित करते सौरमन्डल के सूर्य की तरह प्रतिपल चमकना तो भेड़ प्रवृत्ति से प्रथक जनसमूह का बनकर घटक अनुगंता, अनुकर्ता नहीं
अग्रदूत बनो अस्तित्व को नई पहचान दो आसान न सही असंभव भी नहीं आकाश के अगणित तारों के मध्य ध्रुवतारा होना....