"मैं तुम्हारा हूँ" लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
"मैं तुम्हारा हूँ" लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 6 जुलाई 2011

"मैं तुम्हारा हूँ......" संध्या शर्मा

"तुम मेरी हो........"
उसने धीरे से  कानों में कहा.....!
सुनकर आनंदविभोर हो उठी थी वह 
मनमयूर ख़ुशी से नाचने लगा........

"मैं किसी को इतनी पसंद हूँ
.....!"  
इसकी कल्पना और उसका सुख

उन शब्दों के जादू में उलझकर
भूल बैठी खुद को....
जब भान आया
तो समझा था उसे
उन शब्दों का सच्चा अर्थ
प्रेम की अपेक्षा
स्वामित्व का भाव ज्यादा था उनमे

दोनों को ही
चाहिए परस्पर आधार 
जब ये संसार चलता है, आपसी प्यार
और सामंजस्य से एक दुसरे के...
तो फिर ये स्वामित्व क्यों.....?
 

लुटा देगी खुशियाँ तुमपर सारी
माँग लेगी दुख सारे तुम्हारे
तपोगे जीवन की धूप में उसके साथ
चलना होगा तुम्हे भी
उसके साथ
बोलो...?
चल सकोगे...?

तो फिर कह दो ना.....!
"मैं तुम्हारा हूँ......."