सोमवार, 30 जुलाई 2012

खासियत हमारी...संध्या शर्मा



जीने की चाहत ना मरने की फुर्सत,
गुजरेगी कैसे ज़िन्दगानी हमारी.
 
अदावत किसी से ना कोई गिला,
है बस यही एक खासियत हमारी.

भला न किया तो बुरा भी ना करना,
सिखाती है हमको तरबियत हमारी.

बहुत फर्क है फिर भी है एक जैसी,
ना पूछो हमीं से वल्दियत हमारी.

मेरे पास ए ज़िंदगी अपना क्या है,
एक सांस थी अब रही ना हमारी.

शिद्दतों सहेजे हैं ग़म हमने अपने,
हमीं जानते हैं असलियत हमारी.

 हम क्या करेंगे हसरत किसी की,
हम को तो दरकार नहीं खुद हमारी.

27 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे पास ए ज़िंदगी अपना क्या है,
    एक सांस थी अब रही ना हमारी.,,,,
    संध्या जी,,,,खूबशूरत भाव लिए अच्छी पंक्तियाँ,,,,,

    RECENT POST,,,इन्तजार,,,

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  2. मेरे पास ए ज़िंदगी अपना क्या है,
    एक सांस थी अब रही ना हमारी.

    खूबशूरत भाव

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  3. अदावत किसी से ना कोई गिला,
    है बस यही एक खासियत हमारी.

    आपका ये अंदाज़ बड़ी देर से देखने को मिला

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  4. अदावत किसी से ना कोई गिला,
    है बस यही एक खासियत हमारी.
    यही खासियत हमें सुखी बनाती है...
    बहुत ही बेहतरीन रचना...
    :-)

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  5. खुद को खुद की दरकार नहीं......
    वाह!!
    बहुत बढ़िया गज़ल संध्या जी
    सस्नेह
    अनु

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  6. क्या खूब लिखा है आपने ...

    हम क्या करेंगे हसरत किसी की,
    हम को तो दरकार नहीं खुद हमारी.

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  7. हम क्या करेंगे हसरत किसी की,
    हम को तो दरकार नहीं खुद हमारी... बहुत खूब

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  8. हम क्या करेंगे हसरत किसी की,
    हम को तो दरकार नहीं खुद हमारी

    fantastic lines.. thanks

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  9. शिद्दतों सहेजे हैं गम हमने अपने, हमीं जानते हैं असलियत हमारी। कितना कुछ बीत जाता है हमारे ऊपर, कुछ नहीं कहते क्या सोचेंगे वो अपने लोग उनकी तो रूह काँप जाएगी, इन दो पंक्तियों में हर आदमी के जीवन के भीतर के महाभारत का सार है।

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  10. भला न किया तो बुरा भी ना करना,
    सिखाती है हमको तरबियत हमारी.

    खूब कहा ...

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  11. साधूभाव, साक्षी भाव युक्त प्रवाहमयी रचना

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  12. भला न किया तो बुरा भी ना करना,
    सिखाती है हमको तरबियत हमारी....वाह: बहुत सुन्दर पंक्तियाँ..

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  13. शिद्दतों सहेजे हैं ग़म हमने अपने,
    हमीं जानते हैं असलियत हमारी.


    बहुत सुंदर, क्या कहने

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  14. वाह वाह बहुत ही खुबसूरत है पोस्ट।

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  15. हम क्या करेंगे हसरत किसी की,
    हम को तो दरकार नहीं खुद हमारी...
    वाह ... बहुत खूब

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  16. वाह ! वाह ! हर शेर दिल से निकला हुआ..ऐसा ही है यह जीवन...खाली खाली सा..

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  17. अदावत किसी से ना कोई गिला,
    है बस यही एक खासियत हमारी

    बधाई अच्छी रचना के लिए !

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  18. शिद्दतों सहेजे हैं ग़म हमने अपने,
    हमीं जानते हैं असलियत हमारी.

    बेहतरीन प्रस्तुति !
    आभार !

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  19. शिद्दतों सहेजे हैं ग़म हमने अपने,
    हमीं जानते हैं असलियत हमारी.

    बेहतरीन रचना के लिए बधाई.

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  20. .. मन को छूती हुई ...कविता बढ़िया बनी है.

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  21. मेरे पास ए ज़िंदगी अपना क्या है,
    एक सांस थी अब रही ना हमारी.

    ...बहुत खूब!...ख़ूबसूरत प्रस्तुति..

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  22. अदावत किसी से ना कोई गिला,
    है बस यही एक खासियत हमारी
    वाह बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति ........

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  23. अदावत किसी से ना कोई गिला,
    है बस यही एक खासियत हमारी
    वाह बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति ........

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  24. अदावत किसी से ना कोई गिला,
    है बस यही एक खासियत हमारी.

    kya bat hai....

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