बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

अपना वज़ूद बताओ... संध्या शर्मा


 सीने में गर है तुम्हारे दिल
तो दर्द से तड़पकर दिखाओ 

गर तुम्हे कोई इंसा कहे तो
मन में दर्द-ए-अहसास जगाओ

किसी ठोकर से गर टूटे दिल
नगमा मोहब्बत का सुनाओ

नफ़रत-ए-खंजर लिए लोगों को
अपनी ठोकरों से धूल चटाओ 

गर अमन से बना सको तुम 
इस जहान को जन्नत बनाओ 

है दम अगर डूबने से पहले 
मझधार से कश्ती ले आओ

39 टिप्‍पणियां:

  1. गर अमन से बना सको तुम इस जहान को जन्नत बनाओ
    है दम अगर डूबने से पहले मझधार से कश्ती ले आओ

    बहुत सुन्दर आह्वान है संध्या जी ! बहुत खूब !

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  2. हमने जमाने का अजब दस्तुर देखा
    कहते हैं अब वजूद भी दिखना चाहिए
    रहता है वो आसमां में दिखता नहीं
    उसे अब सामने आकर दिखना चाहिए

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  3. नफ़रत-ए-खंजर लिए लोगों को
    अपनी ठोकरों से धूल चटाओ

    गर अमन से बना सको तुम
    इस जहान को जन्नत बनाओ
    बहुत सही कहा ...

    जवाब देंहटाएं
  4. सीने में गर है तुम्हारे दिलतो दर्द से तड़पकर दिखाओ
    ... सन्देश के साथ सकारात्मक प्रस्तुति ! इसे पढ़ कर दिल खुश हो गया ! आभार एवं शुभकामनाएं !

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  5. सुन्दर संदेश देती रचना।

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  6. गर अमन से बना सको तुम
    इस जहान को जन्नत बनाओ

    सार्थक संदेश!

    सादर

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  7. सार्थक सन्देश देती अच्छी प्रस्तुति

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  8. किसी ठोकर से गर टूटे दिल
    नगमा मोहब्बत का सुनाओ ..

    ये बात सच्व्ह है पर होना बहुत ही मुश्किल ...
    ऐसा हो जाए तो जीवन संवर जाता है ...

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  9. है दम अगर डूबने से पहले
    मझधार से कश्ती ले आओ...sundar panktiyan..

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  10. अत्यंत भावुक रचना.
    गूगल की नयी Privacy Policy पर मेरा लेख जरूर पढ़े.

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  11. अत्यंत भावुक रचना
    गूगल की पर मेरा लेख अवश्य पढ़ें

    जवाब देंहटाएं
  12. अत्यंत भावुक रचना
    गूगल की Privacy Policy पर मेरा लेख अवश्य पढ़ें.

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  13. बहुत खूब ....खुबसूरत शेर |

    जवाब देंहटाएं
  14. गर अमन से बना सको तुम
    इस जहान को जन्नत बनाओ
    बहुत खूब कहा है ।

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  15. बढ़िया...
    दमदार प्रस्तुति...

    सस्नेह.

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  16. किसी ठोकर से गर टूटे दिल
    नगमा मोहब्बत का सुनाओ

    वाह...कितनी अच्छी बात की है आपने...बधाई

    नीरज

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  17. संध्या जी !बहुत सुन्दर भावो के साथ सार्थक रचना ..

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  18. //गर तुम्हे कोई इंसा कहे तो
    मन में दर्द-ए-अहसास जगाओ

    नफ़रत-ए-खंजर लिए लोगों को
    अपनी ठोकरों से धूल चटाओ //

    kya baat hai sandhya ji.. bahut khoob..

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  19. प्रेरक और खुबसूरत रचना.....

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  20. गर अमन से बना सको तुम
    इस जहान को जन्नत बनाओ
    सार्थक सन्देश !

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  21. गर अमन से बना सको तुम
    इस जहान को जन्नत बनाओ

    Bahut Sunder Sandesh...

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  22. सार्थक रचना।
    गहन संदेश।

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  23. कम शब्दों में बेहतर सन्देश
    kalamdaan.blogspot.com

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  24. आपके उत्‍कृष्‍ठ लेखन का आभार ।

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  25. मोहित कर दिया आपने..बहुत सुन्दर लिखा है ..

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  26. है दम अगर डूबने से पहले
    मझधार से कश्ती ले आओ.bahut khoob sandhya jee.

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  27. है दम अगर डूबने से पहले
    मझधार से कश्ती ले आओ
    बहुत खूब .

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  28. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  29. नफ़रत-ए-खंजर लिए लोगों को
    अपनी ठोकरों से धूल चटाओ

    गर अमन से बना सको तुम
    इस जहान को जन्नत बनाओ
    ...बहुत सुन्दर सन्देश के साथ सकारात्मक प्रस्तुति

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  30. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.in/2012/02/777.html
    चर्चा मंच-777-:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  31. है दम अगर डूबने से पहले
    मझधार से कश्ती ले आओ


    क्या बात है बहुत खूब.

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  32. सीने में अगर दिल है-----दर्दे अहसास जगाओ
    सुन्दर सन्देश देती रचना |
    आशा

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  33. गर तुम्हे कोई इंसा कहे तो
    मन में दर्द-ए-अहसास जगाओ

    .....बहुत सुंदर और सकारात्मक रचना...

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  34. अपने वजूद को पहचानने में ही उम्र निकल जाती है. सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति. बहुत सुंदर.

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