Wednesday, February 29, 2012

मेरे गीतों का आधार... संध्या शर्मा


क्या बिना अभिव्यक्ति के

प्यार प्यार नहीं होता

क्यों इतना मुश्किल है

प्रेम को दर्शाना

क्यों न अंतर में

इस प्रेम को जियें

आखों से कहें

आँखों की सुनें...





आँचल उड़ा

नभ से बादल गिरा

आह छन गई

प्रीत बन गई

भावनाएं गहरी

अबीर बन गई

गीत बरसे

स्वर झनझनाने लगे

बिन बाती, तेल

दीप जगमगाने लगे...






जब तेरा है साथ  

मन में विश्वास है

मेरे गीतों को

आधार है तेरा 

बिन तेरे जीवन

निराधार है मेरा 

जैसे पराग फूलों का

श्रंगार है घनेरा

आएगा कभी

फ़िर नया सवेरा...

00-00  


29 comments:

vidya said...

सुन्दर भाव संध्या जी...
प्यार की अभिव्यक्ति उसे पूर्णता प्रदान करती है बस...
वरना प्यार तो प्यार है..अभिव्यक्त किया हो ना किया हो...

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सुंदर प्रेमपगे भाव.....

dheerendra said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति,प्रेम भाव की सुंदर रचना के लिए बधाई,...

MY NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...

Atul Shrivastava said...

बेहतरीन अभिव्‍यक्ति।

Neeraj Tyagi said...

सुन्दर ...बहुत खूब

वाणी गीत said...

क्या बिना अभिव्यक्ति के प्यार प्यार नहीं होता...किसने कहा !!
अंतर में प्रेम को जीना ही सही मायनों में प्रेम है !

dhirendra said...

एक जैसे भाव में तीन शेड्स की कवितायें। अनंत गहराई से प्यार की निहारती कवितायें।

amrendra "amar" said...

waah bahut sunder premabhivyakti.........

Anita said...

सुंदर कविता !

रश्मि प्रभा... said...

प्यार की अभिव्यक्ति छुपती ही नहीं

इमरान अंसारी (عمران انصاری) said...

वाह ......बेहतरीन और शानदार.....बहुत ही अच्छी लगी पोस्ट।

Amrita Tanmay said...

छलके प्रेम सुधा..भींगे तन-मन..अति उत्तम..

sushma 'आहुति' said...

भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

Sunil Kumar said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .......

Aditya said...

//आखों से कहें
आँखों की सुनें...

//आह छन गई
प्रीत बन गई


behad khoobsoorat pankitiyaan..
bahut hi sundar.. :)

Udan Tashtari said...

सुन्दर भावपूर्ण रचना...

Ramakant Singh said...

क्यों न अंतर में

इस प्रेम को जियें

आखों से कहें

आँखों की सुनें...

Ramakant Singh said...

SUPERB EMOTIONS WITH DEEPEST LOVE.

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

नयनों की भाषा बोलती है नीलपरी
यूँ मन के भेद खोलती है नीलपरी
प्रेम प्रगट होता है वुजुद से उनके
कुछ न कहके भी कहती है नीलपरी

अभिषेक प्रसाद said...

yahan thoda sa aapse asahmat hun... prem ko darshana nahi padta.... prem rukne ya chhipaane wali cheej nahi hai... aap chhah kar bhi nahi rok sakti use... wo to wahan tak pahunch hi jayega jiske liye aapka prem hai... aur haan abhivyakti ki jaroorat bhi pyar mein nahi hoti... agar aap kisi se prem karti hai to pyaar khud b khud aapke jeevan kee abhivyakti ban jayegi....

मनीष सिंह निराला said...

सुन्दर प्रेम भाव प्रस्तुति !

रविकर said...

खूबसूरत प्रस्तुति ।

mahendra verma said...

कविता के माध्यम से सही संदेश।

प्यार को अंतस् में महसूस करना ही प्रेम है।
इसके लिए प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं।

Asha Saxena said...

"आह छन गयी ,प्रीत बन गयी ,भावनाएं गहरी ,अबीर बन गयी |"
बहुत सुन्दर पंक्तिगहरे भाव लिए रचना |
आशा

dheerendra said...

सुंदर भाव में प्यार की अभिव्यक्ति बढ़िया पोस्ट ''

बहुत बढ़िया भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,...

NEW POST...फिर से आई होली...
NEW POST फुहार...डिस्को रंग...

केवल राम : said...

मेरे गीतों को
आधार है तेरा
बिन तेरे जीवन
निराधार है मेरा

सच में प्रेम को दर्शाना और अभिव्यक्त करना जरुरी नहीं .....और यह हो भी नहीं पाता जहाँ प्रेम अभिव्यक्त हो गया वहां प्रेम रहा कहाँ ...प्रेम तो अनुभूति है जितना अनुभूत करते जाओ उतना ही यह अभिव्यक्त करना कठिन होता है ....और एक समय ऐसा आता है यह गीतों और जीवन का आधार बन जाता है ....!

सतीश सक्सेना said...

शुभकामनायें होली की ....

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

भावनाएं गहरी

अबीर बन गई

गीत बरसे

स्वर झनझनाने लगे

बिन बाती, तेल

दीप जगमगाने लगे...

वाह, तीनो ही क्षणिकाएं अंतर्मन की कोमल भावनाओं की प्रतिविम्ब हैं !

अमित श्रीवास्तव said...

होली की स्नेहिल शुभकामनाएं...