शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

रेखाएं कुछ कहती हैं... संध्या शर्मा


ऐसी ही है वह
खूब बोलना चाहती है
पर बोलती नहीं
जब बोलने को कहो
कह देती है
कुछ नहीं कहना
हाँ लेकिन उसी वक़्त
उन मुरझाई आँखों से
टपक जाती हैं 
दो बूंदें........!
बिलकुल दर्पण की तरह 
जिसमे झलकता है
उसका प्रतिबिंब 
झुर्रियों भरा चेहरा
स्पष्ट उभर आती हैं
अनगिनत रेखाएं
आखिर उन बूंदों पर
इन अनगिनत
आड़ी-टेढ़ी लकीरों से 
क्या लिख देती है वह....?

   
   

30 टिप्‍पणियां:

  1. चेहरे की लकीरें अनुभव की है गाथा
    बूंद टपकी आंखो से पर उन्नत माथा।

    आभार

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  2. कुछ नहीं कहनाहाँ लेकिन उसी वक़्तउन मुरझाई आँखों सेटपक जाती हैं दो बूंदें........!

    बिलकुल सच है उम्र भर की वेदना और संवेदना को अपने गहराई में समेटे ...सुँदर कविता

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  3. वह सारा अनकहा लिख जाती है , जो एक नहीं कई आँखों से टपकती है और उस अनबोले को मौन लोग समझ ही लेते हैं ...

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  4. आखिर उन बूंदों पर
    इन अनगिनत
    आड़ी-टेढ़ी लकीरों से क्या लिख देती है वह....? अपनी ज़िन्दगी और अनुभवों का सच

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  5. चहरे की रेखाएं इतिहास है उस दर्द का जो अंतस में छुपा लेती हैं..बहुत मर्मस्पर्शी

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  6. वो लिख देती है एक सच कि किसी ने उसकी जिंदगी को जिंदगी नहीं समझा।


    सादर

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  7. दर्द के भावों प्रकट करने में सफल खूबसूरत रचना |

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  8. ऐसी ही हैं वो ...सब कुछ अपने में समेटे हुए ..मौन !

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  9. मैं भी सहमत हूँ /
    सुंदर पोस्ट ॥
    मेरे भी ब्लॉग पर आयें

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  10. शायद वो लिख देती है कि मुझे सिर्फ स्नेह चाहिए, थोडा सा...
    बहुत सुन्दर रचना.

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  11. कुछ न कहकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं चेहरे पर पडी झुर्रियां......
    सुंदर रचना। गहरे भाव।

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  12. बहुत ही हृदय स्पर्शी रचना ।
    बसंत पंचमी और माँ सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ । मेरे ब्लॉग "मेरी कविता" पर माँ शारदे को समर्पित 100वीं पोस्ट जरुर देखें ।

    "हे ज्ञान की देवी शारदे"

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  13. बिलकुल दर्पण की तरह
    जिसमे झलकता है
    उसका प्रतिबिंब
    झुर्रियों भरा चेहरा
    स्पष्ट उभर आती हैं
    अनगिनत रेखाएं
    आखिर उन बूंदों पर
    इन अनगिनत
    आड़ी-टेढ़ी लकीरों से
    क्या लिख देती है वह....?


    एक अनुतरित प्रश्न ! आपको वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें !

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  14. सागर से गहरी है ..ये दो बूंदें !!!
    सुदर अहसास !

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  15. बहुत ही गहरे भावो को शब्दों में पिरोया है..........

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  16. बहुत गहन भाव लिए ये शानदार पोस्ट है|

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  17. बंसतोत्‍सव की अनंत शुभकामनाऍं

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  18. बहुत सुन्दर रचना ...बसंत की शुभकामनायें |

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  19. सुदर अहसास से भरी सुन्दर रचना के लिए बधाई..

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  20. sundr rchna bdhai
    rchna abhi aur kuchh khna chah rhi hai use vytha ka sagr udelne den hridy kii vedna ko shbd ka sanche me dhl kr ek anokha roop dharn krne to den
    dr.vedvyathit@gmail.com
    09868842688

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  21. झुर्रियों में जीवन भर का दर्द छिपा होता है।

    मर्मस्पर्शी कविता।

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  22. कुछ अनुभूतियाँ इतनी गहन होती है कि उनके लिए शब्द कम ही होते हैं !
    बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  23. बहुत सुन्दर भाव और रचना |
    बधाई |
    आशा

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  24. संध्या जी,..मेरा मानना है,इंसान के कर्म ही उसके जीवन का निर्माण करती है
    सुंदर रचना,बेहतरीन प्रस्तुति,
    welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....

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  25. अश्रुओं की भी अपनी भाषा होती है...शब्दों से कहीं सजीव, मार्मिक कविता!

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