Monday, January 9, 2012

"सुनहला ख्वाब"... संध्या शर्मा

 
अपना वादा ऐसे निभाते हैं 
  सदा ख्वाबों में आते-जाते हैं,
     अपने आने का अहसास देकर,
मीलों के फ़ासले मिटाते हैं.
  रजनीगंधा की खुश्बु बनकर,
  मेरी साँसों में सिमट जाते हैं.
   अपनी यादों का हौसला देकर,
   राह मंजिल की वो दिखाते हैं.
                            मेरी सादा सी सूरत को भी,                            
  माहताब सी बता भरमाते हैं.
   वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
 
    मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...


 

31 comments:

वन्दना said...

सुन्दर भावाव्यक्ति।

कुश्वंश said...

अच्छे जज्बातों भरी अभिव्यक्ति

dheerendra said...

सुंदर अभिव्यक्ति बहुत बढ़िया रचना,....
welcom to new post --"काव्यान्जलि"--

Atul Shrivastava said...

बढिया प्रस्‍तुति।
गहरे भावों का सुंदर तरीके से चित्रण।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुंदर मनोभावों को समेटे
पूरी कविता ही बहुत खूबसूरत है...संध्या जी

संजय भास्कर said...

माहताब सी बता भरमाते हैं.
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
.....सुंदर पंक्तियाँ मन को छूती अभिव्यक्ति!!
ह्रदय से आभार

Rakesh Kumar said...

माहताब सी बता भरमाते हैं.
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...

वाह! बहुत अच्छी लगी आपकी यह भावाभिव्यक्ति.
मधुर चिंतन से सुखद अहसास होता है.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत ख्वाब ..

sushma 'आहुति' said...

ख्वाबो और कोमल भावो की अभिवयक्ति......

रविकर said...

बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ||

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत एवं लाजवाब रचना! बधाई!

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

इमरान अंसारी said...

सुभानाल्लाह :-))

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहतरीन।


सादर

kumar said...

खूबसूरत एहसास...

chirag said...

nice and cute poem

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

बहुत मंहगा हुआ मिलना जुलना
किराया भी बहुत लग जाता है।
मिल लिए ख्वाब में बहुत अच्छा
उनके पैट्रोल का खर्च बच जाता है।

आशा said...

वो मुझे श्याम नजर आते हैं -----
सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति |
आशा

आकाश सिंह said...

क्या बात है ? बहुत ही मनमोहक कविता धन्यवाद |

दिगम्बर नासवा said...

वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...

प्रेम जब इस स्थिति को पा लेता है तो आलोकिक हो जाता है ...

Amrita Tanmay said...

जब श्याम राधा से मिल जाता है
शाश्वत प्रेम हो जाता है..

वर्ज्य नारी स्वर said...

बहुत बढ़िया लिखा है |

Ratan Singh Shekhawat said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति

Gyan Darpan
..

Maheshwari kaneri said...

अपना वादा ऐसे निभाते हैं
सदा ख्वाबों में आते-जाते हैं,
अपने आने का अहसास देकर,
मीलों के फ़ासले मिटाते हैं. ...बहुत खूबसूरत भाव से सजी सुन्दर अभिव्यक्ति...

veerubhai said...

भाव विह्वल करती एक बे -चैन रचना .शाम कहो या छलिया बात एक ही है .श्याम रंग में रंगी चुनरिया अब रंग दूजो भावे न ,जिन नैनं में शाम बसें हैं ,और दूसरो आवे न .

Maheshwari kaneri said...

सुंदर मनोभावों को समेटे सुन्दर भावाव्यक्ति।

Kailash Sharma said...

वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...

....बहुत सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति..

मनीष सिंह निराला said...

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना !

Devendra Dutta Mishra said...

वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...
अति सुंदर भाव। आभार।मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें।

Amit Chandra said...

बेहतरीन भाव.

सादर.

अमित श्रीवास्तव said...

sundar bhav..