अपना वादा ऐसे निभाते हैं
सदा ख्वाबों में आते-जाते हैं,
अपने आने का अहसास देकर,
अपने आने का अहसास देकर,
मीलों के फ़ासले मिटाते हैं.
रजनीगंधा की खुश्बु बनकर,
मेरी साँसों में सिमट जाते हैं.
अपनी यादों का हौसला देकर,
राह मंजिल की वो दिखाते हैं.
मेरी सादा सी सूरत को भी,
माहताब सी बता भरमाते हैं.
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
रजनीगंधा की खुश्बु बनकर,
मेरी साँसों में सिमट जाते हैं.
अपनी यादों का हौसला देकर,
राह मंजिल की वो दिखाते हैं.
मेरी सादा सी सूरत को भी,
माहताब सी बता भरमाते हैं.
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...


31 comments:
सुन्दर भावाव्यक्ति।
अच्छे जज्बातों भरी अभिव्यक्ति
सुंदर अभिव्यक्ति बहुत बढ़िया रचना,....
welcom to new post --"काव्यान्जलि"--
बढिया प्रस्तुति।
गहरे भावों का सुंदर तरीके से चित्रण।
बहुत ही सुंदर मनोभावों को समेटे
पूरी कविता ही बहुत खूबसूरत है...संध्या जी
माहताब सी बता भरमाते हैं.
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
.....सुंदर पंक्तियाँ मन को छूती अभिव्यक्ति!!
ह्रदय से आभार
माहताब सी बता भरमाते हैं.
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...
वाह! बहुत अच्छी लगी आपकी यह भावाभिव्यक्ति.
मधुर चिंतन से सुखद अहसास होता है.
खूबसूरत ख्वाब ..
ख्वाबो और कोमल भावो की अभिवयक्ति......
बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ||
बहुत ख़ूबसूरत एवं लाजवाब रचना! बधाई!
बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।
सुभानाल्लाह :-))
बेहतरीन।
सादर
खूबसूरत एहसास...
nice and cute poem
बहुत मंहगा हुआ मिलना जुलना
किराया भी बहुत लग जाता है।
मिल लिए ख्वाब में बहुत अच्छा
उनके पैट्रोल का खर्च बच जाता है।
वो मुझे श्याम नजर आते हैं -----
सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति |
आशा
क्या बात है ? बहुत ही मनमोहक कविता धन्यवाद |
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...
प्रेम जब इस स्थिति को पा लेता है तो आलोकिक हो जाता है ...
जब श्याम राधा से मिल जाता है
शाश्वत प्रेम हो जाता है..
बहुत बढ़िया लिखा है |
बहुत बढ़िया प्रस्तुति
Gyan Darpan
..
अपना वादा ऐसे निभाते हैं
सदा ख्वाबों में आते-जाते हैं,
अपने आने का अहसास देकर,
मीलों के फ़ासले मिटाते हैं. ...बहुत खूबसूरत भाव से सजी सुन्दर अभिव्यक्ति...
भाव विह्वल करती एक बे -चैन रचना .शाम कहो या छलिया बात एक ही है .श्याम रंग में रंगी चुनरिया अब रंग दूजो भावे न ,जिन नैनं में शाम बसें हैं ,और दूसरो आवे न .
सुंदर मनोभावों को समेटे सुन्दर भावाव्यक्ति।
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...
....बहुत सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति..
बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना !
वो मुझे राधा का नाम देते हैं,
मुझे वो श्याम नज़र आते हैं...
अति सुंदर भाव। आभार।मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें।
बेहतरीन भाव.
सादर.
sundar bhav..
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