रविवार, 23 दिसंबर 2012

अंतर्द्वंद...संध्या शर्मा


क्या बताओगे 
आने वाली पीढ़ी को
कि
सिर्फ दिमाग लेकर ही
पैदा हुआ था
आज का इंसान
दिल नहीं था
इसके पास
निज स्वार्थ के आगे
मानवता भी भूला
द्वंद्व है मन के अंदर
सच कहूं तो
अपनी हालत पर
दया से ज्यादा
गुस्सा आता है
जो आज
अपने आप से ही
मुंह छुपाता
फिर रहा हो
जो खुद को
निरन्तर छल रहा हो
जिसके पास
आज के लिए जवाब न हो
कल को क्या जवाब दे पायेगा....

28 टिप्‍पणियां:

  1. जो खुद को
    निरन्तर छल रहा हो
    जिसके पास
    आज के लिए जवाब न हो
    कल को क्या जवाब दे पायेगा....

    ...बहुत सटीक प्रश्न...बहुत सुन्दर..

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  2. अंत:करण की चीख को दबाते हैं ..
    क्‍या जबाब देंगे ऐसे लोग ??

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  3. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 26/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  4. सही प्रश्न उठाये है आपने
    आज को जवाब नहीं दे सकते तो कल
    को क्या जवाब देंगे..

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  5. हमें रुक कर सोचना ही होगा..

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  6. आज के लिए जवाब न हो
    कल को क्या जवाब दे पायेगा....सटीक प्रश्न,,,

    recent post : समाधान समस्याओं का,

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  7. जो आज
    अपने आप से ही
    मुंह छुपाता
    फिर रहा हो
    जो खुद को
    निरन्तर छल रहा हो
    जिसके पास
    आज के लिए जवाब न हो
    कल को क्या जवाब दे पायेगा....

    सच कहा आपने

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  8. वाकई.....
    असहाय और निरुत्तर हैं....

    सशक्त अभिव्यक्ति.
    सस्नेह
    अनु

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  9. संध्या दी सत्य कि ऐसी घटना घटित हुई है जिसने भीतर तक झकझोर दिया है, आपने जो आक्रोश व्यक्त किया है वो लाजमी है.

    जो खुद को
    निरन्तर छल रहा हो
    जिसके पास
    आज के लिए जवाब न हो
    कल को क्या जवाब दे पायेगा....

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  10. बहुत संवेदनशील ह्रदय को झकझोर देनेवाली कविता .

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  11. जिसके पास
    आज के लिए जवाब न हो
    कल को क्या जवाब दे पायेगा....

    बिलकुल सच...और चिंताजनक...

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  12. हर चीज़ को दिमाग से देखने की आदत ... प्रेक्टिकल होने की आदत ... सच है दिल की कमी होती जारही है आज सब जगह ...

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  13. फिर भी एक उम्मीद की किरण कायम है ..

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  14. क्या बता सकोगे आपने आगत से अपना हर सच

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  15. बिलकुल सही प्रश्न उठाया आपने।


    सादर

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  16. यकीनन बौद्धिकता की बाढ़ में भावनाएं तो मरी हुई ही लगती है..
    सुंदर रचना।।।

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  17. सुदृढ़ ...सार्थक अभिव्यक्ति ....

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  18. "जिसके पास
    आज के लिए जवाब न हो
    कल को क्या जवाब दे पायेगा...."
    बहुत सुन्दर .

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  19. संध्या जी आपकी इस रचना को कविता मंच पर साँझ किया
    गया है

    संजय भास्कर
    कविता मंच
    http://kavita-manch.blogspot.in

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