बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

अतीत में जीना बुरा होता है... संध्या शर्मा

पारदर्शी लक्ष्मण रेखा  
विरासत में मिली
जो रोक देती 

मेरे तुम तक
बढ़ते कदम
मेरे पाँव मुझसे
नज़दीकियों की
मांग करते 

जिसकी तलाश में
गुजरते रात -दिन
गुम कर दिया
मैंने अपना पता
अपने हाथों से
इसी दुनिया में रहते 

नई दुनिया तराश डाली
अब मेरे मन के
दो पाँव हो गए 

एक पाँव....
अतीत का साथ देता है
दूजा कहता है....
अतीत में जीना बुरा होता है....    

27 टिप्‍पणियां:

  1. अतीत में जीना बुरा होता है.... सच
    वाह ... बहुत ही बढिया ।

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  2. अतीत अगर दुःखदाई हो तो अतीत में जीना बुरा है जीवन प्रवाह चाहता है ,बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  3. वाह , खूबसूरत रचना, सुन्दर शब्द चयन

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  4. और न जाने कितने पाँव आगे लिए चल रहा है ..सुन्दर रचना..

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  5. मैंने अपना पता
    अपने हाथों से
    इसी दुनिया में रहते
    नई दुनिया तराश डाली,,,,सुंदर भावार्थ ,,,,,

    RECENT POST बदनसीबी,

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  6. भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

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  7. पांव तो दो ही होते हैं। बस उन्हे साधना पड़ता है कि कदम ताल सही हो। :)

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  8. अतीत अगर बुरा है तो उस अतीत को भुलाने की कोशिश
    करके आगे बढ़ना चाहिए...
    बेहतरीन रचना....
    :-)

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  9. पर चलना तो वर्तमान में पड़ता है ..... यदि एक पाँव अतीत में ही रहे तो लड़खड़ा जाएंगे ....

    सुंदर प्रस्तुति

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  10. मन डगमगाता है....पांव बढ़ते हैं खुद-ब-खुद...
    सुन्दर भाव...
    सस्नेह
    अनु

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  11. अदभुत--बहुत सुंदर
    बहुत बहुत बधाई

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  12. ये भी एक कशमकश है..... सुंदर पंक्तियाँ

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  13. अब मेरे मन के
    दो पाँव हो गए
    एक पाँव....
    अतीत का साथ देता है
    दूजा कहता है....
    अतीत में जीना बुरा होता है.

    यह कशमकश छोड़ आगे बढना है
    Latest postअनुभूति : चाल ,चलन, चरित्र (दूसरा भाग )

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  14. बेहद सुन्दर पंक्तियाँ हैं दी, हार्दिक बधाई

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  15. Badhai ... behtreen panktiyo ke liye
    http://ehsaasmere.blogspot.in/2013/02/blog-post.html

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  16. गुम कर दिया
    मैंने अपना पता
    अपने हाथों से
    इसी दुनिया में रहते
    नई दुनिया तराश डाली
    अब मेरे मन के
    दो पाँव हो गए
    एक पाँव....
    अतीत का साथ देता है
    दूजा कहता है....
    अतीत में जीना बुरा होता है.

    अजीब सी कसमकश

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  17. भीतर के अंतर्द्वंद को दर्शाती सुन्दर पोस्ट।

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  18. मन के दो पांव .... एक दूसरे का रास्ता काटते रहते हैं

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  19. बहुत बढि़या- सारिक खान
    http://sarikkhan.blogspot.in/

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  20. दो पाँव हो गए
    एक पाँव....
    अतीत का साथ देता है
    दूजा कहता है....
    अतीत में जीना बुरा होता है....!

    मन के अंतर्द्वंद्व को बेहतर अभिव्यक्ति मिली है ....गहन भावों का सम्प्रेषण ...!

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  21. मन के अंतर्द्वन्‍द्व को दर्शाती सुंदर रचना ..

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