रविवार, 4 दिसंबर 2011

सांस और जिंदगी ... संध्या शर्मा

सांस...
ये सांसो की नाज़ुक सी कड़ी
ये सांसो की लम्बी सी लड़ी

सहेजी जाए पिरोई नही जाए
जाने कब टूटे बिखर जाए
...?    जिंदगी...   बड़ी अजीब सी हो गयी है जिन्दगी
कभी दर्द कभी मुस्कान है जिन्दगी
कभी पतझड़ कभी बहार है जिन्दगी
कभी झम बरसती फ़ुहार है जिन्दगी

घड़ी के कांटो सी सरकती ये जिन्दगी
कब किस मोड़ पर ठहर जाए जिन्दगी
कोई उम्मीद नही जगाए ये जिन्दगी
जाने किस घड़ी छूट जाए ये जिन्दगी

समय बड़ा बलवान छोटी है जिन्दगी
यूं ही जिन्दगी को खा रही है जिन्दगी
वक्त के हाथों मरहम लगाएगी जिन्दगी?
गोया किश्तो में चली जाएगी जिन्दगी?

21 टिप्‍पणियां:

  1. ज़िन्दगी तो बेवफ़ा है एक दिन ठुकरायेगी मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जायेगी……………बस यही हकीकत है।

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  2. समय बड़ा बलवान छोटी है जिन्दगी
    यूं ही जिन्दगी को खा रही है जिन्दगी
    वक्त के हाथों मरहम लगाएगी जिन्दगी?
    गोया किश्तो में चली जाएगी जिन्दगी? वाह! बहुत खुबसूरत जिन्दगी का ये फलसफा लगा जिस तरह आपने बयाँ किया.....

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  3. वक्त के हाथों मरहम लगाएगी जिन्दगी?
    गोया किश्तो में चली जाएगी जिन्दगी?

    Bahut Badhiya....

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  4. सुंदर रचना..
    नई पोस्ट में स्वागत है

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  5. जिंदगी के अनेक आयाम लिख दिए आपने ... पर फिर भी जिंदगी क्या है पता नहीं चलता ...

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  6. सांसों और जिंदगी का सुंदर तरीके से चित्रण।

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  7. समय बड़ा बलवान छोटी है जिन्दगी
    यूं ही जिन्दगी को खा रही है जिन्दगी
    वक्त के हाथों मरहम लगाएगी जिन्दगी?
    गोया किश्तो में चली जाएगी जिन्दगी?


    वाह! जिंदगी के भी कितने रंग हैं जी.
    बहुत अच्छी लगी आपकी प्रस्तुति.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा संध्या जी.

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  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! अधिक से अधिक पाठक आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
    चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  9. वाह! बहुत खुबसूरत जिन्दगी का ये फलसफा लगा.

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  10. वाह. बेहद खूबसूरत रचना. आभार.

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  11. jindagi yesi hi hai saath lekar aaye saath lekar jaaye.jindagi ka bahut achcha vishleshan kiya hai.

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  12. जिन्दगी से जिन्दगी कर रही प्रश्न
    खूबसुरत है जिन्दगी मनाएं जश्न॥

    काव्य का यह अंदाज अच्छा लगा।
    आत्म चिंतन अंदाज अच्छा लगा॥

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  13. ज़िन्दगी की परिभाषा को आपने बखूबी शब्दों में पिरोया है! सुन्दर रचना!

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  14. जिंदगी को शब्दों में पिरो कर खूबसूरत माला के रूप मनभावन प्रस्तुति.

    बधाई.

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  15. न जाने क्या-क्या और क्यों है ये जिंदगी............बहुत खूबसूरत पोस्ट|

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  16. घड़ी के कांटो सी सरकती ये जिन्दगी
    कब किस मोड़ पर ठहर जाए जिन्दगी

    सुन्दर रचना....
    सादर...

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  17. संध्या जी!!!!!!!!!
    जिंदगी जिन्दा दिली का नाम है
    मुर्दा दिल क्या खाख जिया करते है....
    खुबशुरत पोस्ट ....
    मेरे नए पोस्ट में आपका इन्जार है ,///

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  18. आपका पोस्ट मन को प्रभावित करने में सार्थक रहा । बहुत अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट ' आरसी प्रसाद सिंह ' पर आकर मेरा मनोबल बढ़ाएं । धन्यवाद ।

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  19. सुन्दर प्रस्तुति |

    होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
    कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।

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