सोमवार, 19 दिसंबर 2011

अंतिम कविता... संध्या शर्मा


सृष्टि के अंतिम दिन
उसके और हमारे बीच
कोई नहीं होगा
तब मृत्यु
एक कविता होगी
एक अंतिम कविता
बिना किसी भेद-भाव के
स्वागत करेगी सबका
उस दिन यह दुनिया
न तेरी होगी
न मेरी होगी
जब धरा लुढ़क रही होगी
खुल जायेगा
सिन्धु का तट बंध
बिखर जायेगा अम्बर प्यारा
अंधकार के महागर्त में
खो जायेगा जहाँ सारा
तब हम बहेंगे
पानी बनकर साथ-साथ
नए सिरे से रचना होगी
कुछ क्षण को ही सही
ये दुनिया अपनी होगी
एक ओर हो रहा होगा पतन
कहीं मिलेगा नवयुग को जीवन.... 

33 टिप्‍पणियां:

  1. सच है, उस दिन कुछ नहीं होगा, बस वही होगा, बस वही होगा।

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  2. सुंदर रचना।
    (अंतिम कविता पर ये रही पहली टिप्‍पणी।)

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  3. तब मृत्यु
    एक कविता होगी
    एक अंतिम कविता
    बिना किसी भेद-भाव के
    स्वागत करेगी सबका...nihsandeh... bahut hi gahre ehsaas

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  4. गहन भावों का समावेश ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  5. क़यामत का मंज़र और कविता वो भी अंतिम.............सुभानाल्लाह|

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  6. वाह ... क्या विलक्षण सोच है ... सच कहा है उस दिन कोई नहीं होगा .. बस मौन कविता होगी ... बहुत खूब ...

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  7. सृश्टि का आराम्भ एवं अवसान एक कविता है। लय और ताल द्वारा नव सृष्टि की प्रारंभ, अब अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, कहीं 22 दिसम्बर 2012 को आपकी कविता सत्य हो जाए, और हम उसके साक्षी बनें :)

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  8. मौन मे समाहित कविता का नाद अद्भुत होगा……………बेहद उम्दा भावाव्यक्ति।

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  9. कल 20/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  10. सृष्टि के अंतिम दिन
    उसके और हमारे बीच
    कोई नहीं होगा
    तब मृत्यु
    एक कविता होगी
    एक अंतिम कविता

    वो पल भी क्या पल होगा...

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  11. एक अतिसंवेदनशील रचना जो निशब्द कर देती है .....

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  12. गहरी अभिव्यकित से लिखी निशब्द करती बेहतरीन रचना,...बधाई...

    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....

    आफिस में क्लर्क का, व्यापार में संपर्क का.
    जीवन में वर्क का, रेखाओं में कर्क का,
    कवि में बिहारी का, कथा में तिवारी का,
    सभा में दरवारी का,भोजन में तरकारी का.
    महत्व है,...
    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  13. तब मृत्यु
    एक कविता होगी
    एक अंतिम कविता
    बिना किसी भेद-भाव के
    स्वागत करेगी सबका....गहन अहसास के साथ भावपूर्ण रचना....

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  14. म्रत्यु जीवन का शास्वत सच है ........सुंदर भाव

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  15. महा विध्वंस में कुछ तो बचेगा ही ...मानव निर्माण कर ही लेगा..
    शुभकामनायें आपको !

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  16. बहुत बढ़िया ..... उस मंज़र को सही शब्द दिए ....

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  17. बहुत ही भावपूर्ण निशब्द कर देने वाली रचना . गहरे भाव.

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  18. तब हम बहेंगे
    पानी बनकर साथ-साथ
    नए सिरे से रचना होगी
    कुछ क्षण को ही सही
    ये दुनिया अपनी होगी....
    बेहद उम्दा .

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  19. शानदार और प्रभावी प्रस्तुति.

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  20. सृष्टी की सुन्दर कविता मनोहारी है .

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  21. गहन अहसासों से परिपूर्ण एक सशक्त प्रस्तुति...

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  22. मनोहारी सुंदर अहसासों से सजी एक अच्छी रचना,.....

    मेरी नई पोस्ट के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  23. पतन के बाद नवजीवन की कल्पना सुखद है , सृष्टि की अंतिम कविता नए युग का निर्माण भी करेगी !

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  24. गहरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना!
    क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
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  25. आपकी इस रचना को कविता मंच पर साँझा किया गया है

    कवता मंच
    http://kavita-manch.blogspot.in

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