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गुरुवार, 8 मई 2014

मेरे नाम...



शब्द भरे भंडार तुम्हारे छोटा सा काम कर दो,
कुछ शब्द अपने कोषागार से मेरे नाम कर दो॥

धूल भरी गर्म आंधियों में चक्रवात सिर पर चढा,
बरसे फ़ुहार पावस सी सावन मेरे नाम कर दो ॥

तुम्हारी राह के कांटे चुन लूंगी पलको से अपनी,
प्यार के कुछ बोल मनभावन मेरे नाम कर दो॥

चढ रही हैं बुलंदियों पे नफ़रतों की आँधियाँ अब,
सीप में छिप जाऊंगी मैं सागर मेरे नाम कर दो॥

प्रेम रहे सदा जहाँ में, लबो पे रहे तराने हरदम,
अपनी एक खूबसूरत सरगम मेरे नाम कर दो॥

प्यास सदियों की रही है लबों पर हरदम हरवक्त,
ये मीना, सागर साकी औ जाम मेरे नाम कर दो॥

सोमवार, 28 अप्रैल 2014

इतिहास लिख दो...


हमारे नाम ज़िन्दगी  हर सांस लिख दो,                      
रड़क रही जो सीने में वो फ़ांस लिख दो।

 मंज़िल जो हमसे अभी दूर बहुत दूर है,
ख्वाबों में मंज़िल का अहसास लिख दो।

गुंचा-ए-गुल खिला अबके इस गुलशन में,
राहे सफ़र में अपना हर ख्वाब लिख दो।

नज़्म,  ग़ज़ल, अफ़सानों की रवायत है,
वक्त भी पढे जिसे कुछ खास लिख दो।

कान में चुपके से सरसराती हवा ने कहा,                                      
इस घने अँधेरे में तुम उजास लिख दो।

याद रखे सदियों तक ये जमीं आसमां,
चलो कलम उठाओ इतिहास लिख दो।