मंगलवार, 19 जून 2012

बरखा ... संध्या शर्मा



http://2.bp.blogspot.com/-732FbfgwWys/Tn85vdV9XCI/AAAAAAAAAQE/Jdp8VlFJHrg/s1600/Woman+in+the+Rain.jpg

कब आऊं?
बरखा ने पूछा
जब इच्छा हो
मैंने कहा
कितना भी भीगो
सूखी ही रहोगी
वह मुस्कुराकर बोली
तुम सुनाने लगे कहानी
एक दिन....!
तुम और मैं साथ-साथ
बैठे थे जिस कागज़ की नाव पर
भिगो गई थी यह उसे
पलट गई थी वह
तब से बैर हो गया
तुमसे बरखा का
वह अलग बरसती रही
तुम अलग
मैं खड़ी रह गई
दोनों के बीच
सूखी नदी की तरह
उमस बढ़ी
अंतस तपता रहा
आज बीज बोने के बाद
स्वीकार कर पाए तुम उसे
बस इतना ही कह सके
कभी तो आएगी वह
राह देखेंगे मिलकर....

25 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर..........
    मुझे तो भिगो गयी..........

    सस्नेह

    उत्तर देंहटाएं
  2. मनोभावों का सहज सम्प्रेषण ....!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बेहतरीन सुंदर प्रस्तुति,,,,,,,

    RECENT POST ,,,,फुहार....: न जाने क्यों,

    उत्तर देंहटाएं
  4. बरखा से बैर ... वो भी इतना की भिगो नहीं पाती वो बरसने के बावजूद ... गहरी कल्पना ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. अंतस तपता रहा .... अब तो स्वीकार कर लिया न ? भिगो ही देगी बरसा अब तो .... बहुत सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  6. बड़ी सुन्दरता से बांधा है भावों को कविता में

    उत्तर देंहटाएं
  7. सरल मनोभावों की प्रस्तुति .... अति सुंदर ....

    उत्तर देंहटाएं
  8. भीगी=भीगी सी सुन्दर रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  9. बरखा के एक नए रूप से आवगत करवाया हैं आज आपने ..बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही सुन्दर भाव संध्याजी ....!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही बढ़िया
    कोमल भाव लिए रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाकई सुंदर है यह रचना ...
    बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  13. कभी तो आएगी वह
    राह देखेंगे मिलकर....

    सुंदर रचना ..जागी रहे आस ...शुभकामनायें..

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर और मन मोहती रचना |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  15. **♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**
    ~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~
    *****************************************************************
    सूचनार्थ


    सैलानी की कलम से

    पर्यटन पर उम्दा ब्लॉग को फ़ालो करें एवं पाएं नयी जानकारी



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥


    ♥ पेसल वार्ता - सहरा को समंदर कहना ♥


    ♥रथयात्रा की शुभकामनाएं♥

    ब्लॉ.ललित शर्मा
    ***********************************************
    ~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^
    **♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**

    उत्तर देंहटाएं
  16. वह अलग बरसती रही
    तुम अलग
    मैं खड़ी रह गई
    दोनों के बीच
    सूखी नदी की तरह

    ....बहुत कोमल अहसास..सुन्दर भावपूर्ण रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत सारगर्भित पक्तियां। हर शब्द का चयन अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है धन्यवाद।।

    उत्तर देंहटाएं
  18. सुन्दर भावपूर्ण रचना.

    उत्तर देंहटाएं