सोमवार, 27 जुलाई 2015

सुप्रभात...

किरणों का साथ पाकर
जीना सीखती आशाएँ 
मानो उड़ना चाहती हैं
क्षितिज के भी उस पार
अजब सुर्ख एहसास से 
जाग उठी सुबह के साथ..... 

6 टिप्‍पणियां:

  1. हर सुबह ऐसी हो हो तो जिंदगी संवर जाती है ... बहुत सुन्दर ...

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  2. इन एहसासों के साथ मन जाने कितना कुछ कह जाता है कई बार
    बहुत बढिया लिखती हैं आप ....

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  3. सच कहूँ तो पढ़ते ही मन में एक नई ताज़गी सी महसूस हुई। तुम्हारे शब्दों में उम्मीद, रोशनी और उड़ान की भावना बहुत खूबसूरती से झलकती है। मुझे अच्छा लगा कि तुमने बहुत कम शब्दों में इतना गहरा एहसास बयां किया है। ये कविता छोटी है, पर इसमें दिन की शुरुआत की पूरी ऊर्जा और positivity समाई है।

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