सोमवार, 27 जुलाई 2015

सुप्रभात...

किरणों का साथ पाकर
जीना सीखती आशाएँ 
मानो उड़ना चाहती हैं
क्षितिज के भी उस पार
अजब सुर्ख एहसास से 
जाग उठी सुबह के साथ..... 

5 टिप्‍पणियां:

  1. हर सुबह ऐसी हो हो तो जिंदगी संवर जाती है ... बहुत सुन्दर ...

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  2. इन एहसासों के साथ मन जाने कितना कुछ कह जाता है कई बार
    बहुत बढिया लिखती हैं आप ....

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