गुरुवार, 14 नवंबर 2013

फूलों के मौसम में...


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शाम अभी ढली नही
सुबह अभी हुई नही
आओ करें इंतज़ार 
गुनगुनी सी धूप में
ठंडी-ठंडी बयार का
ढलती हुई शाम का
धुंधली सी सुबह का
रूठी सी चांदनी में
खोये से चाँद का
फूलों के मौसम में
झूमती बहार का...

15 टिप्‍पणियां:

  1. ये इंतज़ार तो सभी को है ... तभी जीवन है ...

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  2. बिना इंतज़ार के जीवन अधूरा है |
    उम्दा रचना संध्या जी |
    आशा

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  3. अच्छा लगता है ऐसा इंतज़ार....जिसका फल सदा मीठा हो!!!
    बहुत सुन्दर कविता.

    सस्नेह
    अनु

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (15-11-2013) को "आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बहुत ही सुन्दर और प्यारी रचना...
    :-)

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण....

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