शुक्रवार, 16 मार्च 2012

रच दूंगी मै संसार निराला -------- संध्या शर्मा


महाप्रलय से भयभीत न होना
रच दूंगी संसार निराला
दुनिया की तस्वीर बना दूँ
जो रंग कोई हो भरने वाला


महाप्रलय से भयभीत न होना
रच दूंगी मैं संसार निराला

सतरंगी किरणें उतरेंगी
हर्ष का होगा नया उजाला
नए खग नए तरुवर होंगे
नया जग होगा मतवाला

महाप्रलय से भयभीत न होना
रच दूंगी मैं संसार निराला

सांच झूठ का नाम न होगा
होगी नई रवि की ज्वाला
 कोई अर्थ न दे पायेगी
अहंकार की अब मधुशाला

महाप्रलय से भयभीत न होना
रच दूंगी मैं संसार निराला

करुण कथा तेरे विनाश की
कोई न होगा सुनने वाला
विष का सृजन बहुत हो चुका
भर जाने दो अमृत प्याला

महाप्रलय से भयभीत न होना
रच दूंगी मैं संसार निराला

नयी सुबह और नए जगत का
अवसर नहीं अब टलने वाला
फ़िर झूम कर नाचे गाएगा
मधुर- मधुर बांसुरी वाला

महाप्रलय से भयभीत न होना
रच दूंगी मैं संसार निराला

39 टिप्‍पणियां:

  1. माया वाले दें डरा, करें सभ्यता ख़त्म ।

    साधुवाद है आपको, भरे हमारे जख्म ।।

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  2. अति सुन्दर सृजन संसार ही तो रच डाला है ..शुभकामनाएं..

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  3. महाप्रलय से भयभीत न होना
    रच दूंगी मैं संसार निराला
    बहुत सुंदर अच्छी रचना..

    MY RESENT POST...काव्यान्जलि ...: तब मधुशाला हम जाते है,...

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  4. नयी सुबह और नए जगत का
    अवसर नहीं अब टलने वाला
    फ़िर झूम कर नाचे गाएगा
    मधुर- मधुर बांसुरी वाला

    महाप्रलय से भयभीत न होना
    रच दूंगी मैं संसार निराला
    उत्साह सृजन करती सुन्दर रचना

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  5. कल 17/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  6. लाजवाब रचना, सचमुच बहुत सुन्दर लिखा है आपने साधुवाद

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  7. नयी सुबह और नए जगत का
    अवसर नहीं अब टलने वाला
    फ़िर झूम कर नाचे गाएगा
    मधुर- मधुर बांसुरी वाला

    महाप्रलय से भयभीत न होना
    रच दूंगी मैं संसार निराला

    प्रेरणा जगाती सुंदर पंक्तियाँ!

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  8. इसे कहते हैं उम्मीदों का उजाला

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  9. अनुपम भाव संयोजन लिए उत्‍कृष्‍ट लेखन ।

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  10. जिस शक्ति ने रची थी सृष्टि
    प्रलयोपरांत रचेगी फ़िर से
    शुन्य में स्वर झंकृत होगा
    मौन मुखर फ़िर होने वाला

    नंदन वन में सोन चिरैया
    गीत मधुर गाएगी फ़िर से
    रची जाएगी फ़िर मधु से
    नव गीतों की मधुरं हाला

    ये माटी की रचना माटी से
    मातृ शक्ति रच दे फ़िर से
    फ़िर चाहे हो बारम्बार प्रलय
    मानव नही है डरने वाला

    प्रणम्य है वह मातृ शक्ति
    जो रचती है फ़िर फ़िर से
    उस आंचल की छांह तले
    नाचे जग मग मतवाला

    केनवास पर जैसे किसी चित्रकार ने स्वर्ण तूलिका से रच डाली सृष्टि । सृष्टि का जनक शायद ऐसे ही कहता होगा। सबको ढांढस बंधाता होगा………हो जाने दो महाप्रलय। मुझे रचना आता है। यह तो नश्वर लोक है प्राणी। बस तू आता जाता है। न जाने कितनी बार रची सृष्टि मैने……… कितनी बात प्रलय आया। बहुत ही भावपूर्ण कविता है। नवीन सृष्टि की रचना करने की आकांक्षा अटूट विश्वास को प्रकट करती है। हे! मातृ शक्ति इस सृष्टि को रचा ही है तूने………… महाप्रलय के पश्चात भी रच सकती है……………मेरा कवि मन अपने को रोक नहीं पाया…… कुछ कहने की इच्छा कर बैठा………आभार

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  11. सृजन सतत और महत्वपूर्ण है ...
    शुभकामनायें आपको !

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  12. बहुत सुन्दर...
    आपकी कल्पना का संसार वाकई निराला है...
    सादर.

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  13. उम्‍मीद पर सब कुछ निर्भर करता है।
    बेहतरीन भाव।

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  14. बहुत ओज पूर्ण कविता ... यही संकल्प होना चाहिए ...

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  15. नयी सुबह और नए जगत का
    अवसर नहीं अब टलने वाला
    फ़िर झूम कर नाचे गाएगा
    मधुर- मधुर बांसुरी वाला

    महाप्रलय से भयभीत न होना
    रच दूंगी मैं संसार निराला

    वाह वाह .. बहुत सकारात्‍मक !!

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  16. महाप्रलय से भयभीत न होना
    रच दूंगी मैं संसार निराला..........बहुत अच्छी रचना

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  17. करुण कथा तेरे विनाश की
    कोई न होगा सुनने वाला
    विष का सृजन बहुत हो चुका
    भर जाने दो अमृत प्याला

    महाप्रलय से भयभीत न होना
    रच दूंगी मैं संसार निराला..

    आपका रचित यह संसार बड़ा ही लुभावना लगा ...
    नए युग की शुरुआत सचमुच आश्चर्यपूर्ण होगी ?

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  18. नयी सुबह और नए जगत का
    अवसर नहीं अब टलने वाला
    फ़िर झूम कर नाचे गाएगा
    मधुर- मधुर बांसुरी वाला ..

    आमीन ... जल्दी ही ऐसा युग आये तो जीवन मधुर हो जायगा ... बहुत ही उत्साहित करती रचना ...

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  19. नयी सुबह और नए जगत का
    अवसर नहीं अब टलने वाला
    फ़िर झूम कर नाचे गाएगा
    मधुर- मधुर बांसुरी वाला
    .....
    सुंदर गीत है संध्या जी !

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  20. सकारात्मक सोच लिये बहुत सुंदर और प्रवाहमयी अभिव्यक्ति...

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  21. नयी सुबह और नए जगत का
    अवसर नहीं अब टलने वाला
    फ़िर झूम कर नाचे गाएगा
    मधुर- मधुर बांसुरी वाला

    गीता में वर्णित " यदा - यदा ही धर्मस्य " पंक्तियों को साकार करती आपकी यह पंक्तियाँ निश्चित रूप से प्रभावकारी हैं ...!

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  22. करुण कथा तेरे विनाश की
    कोई न होगा सुनने वाला
    विष का सृजन बहुत हो चुका
    भर जाने दो अमृत प्याला
    srijan SRIJAN srijan
    beautiful lines on life.
    inspiring to live.

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  23. सुन्दर प्रस्तुति.....बहुत बहुत बधाई...

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  24. सतरंगी किरणें उतरेंगी
    हर्ष का होगा नया उजाला
    नए खग नए तरुवर होंगे
    नया जग होगा मतवाला

    कविमन अपनी भावाभिव्यक्ति से नए संसार का रृजन कर सकता है।
    कविता के भाव मन को प्रभावित करते हैं।

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  25. महाप्रलय से भयभीत न होना
    रच दूंगी मैं संसार निराला... बहुत सुन्दर रचना..

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  26. मन में उमंग बहती सार्थक सोच को अभिव्यक्त करती सुंदर कविता।

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  27. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ. अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)

    हमेशा की तरह उत्कृष्ट रचना...बधाई स्वीकारें...



    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  28. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ. अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)

    हमेशा की तरह उत्कृष्ट रचना...बधाई स्वीकारें...



    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  29. माँ का आशीर्वाद है जो कहता है किसी से भयभीत होना नहीं , प्रलय के बाद सुहानी सुबह होती है !
    बेहतरीन !

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  30. वाह! क्या ही खुबसूरत रचना है...
    सादर.

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