शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

बहने लगे आंसू... संध्या शर्मा

फिर चोट लगी
भर आई आँखे
पर आंसू नहीं बहे
नहीं बहने दिया उन्हें
अपने सीने से लगा लिया
छुपा लिया...

फिर टूटे ख्वाब
रोया दिल
भर आई आँखे
पर आंसू नहीं बहे
खुद को दिया हौसला
दिखाए नए ख्वाब...

फिर छूटे अपने
टूटे रिश्ते
फिर रोया दिल
पर नहीं बहे आंसू
समेट लिया अपने आप को
बना डाली सीमा...

फिर देखा
सिसकता बचपन
बेपरवाह जवानी
तडपती ममता
लाचार बुढ़ापा
चीख उठा मन 

नहीं रुके
बहने लगे आंसू...
   

25 टिप्‍पणियां:

  1. आंसुओ के दर्द की गहरी अभिव्यक्ति है कविता में
    ज़िन्दगी के एक सच की तरह है यह रचना

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  2. हरेक पंक्ति बहुत मर्मस्पर्शी
    आप के शब्द और उनमें गुंथे भाव अद्भुत ही प्रभावशाली हैं...!

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  3. यही तो ज़िन्दगी की कहानी है।

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  4. आपकी भावुक और मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति
    दिल को कचोटती है.

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  5. क्या प्रभावशाली ढंग से आपने भावों को गढा है शब्दों के साथ ...बहुत प्रभावशाली अद्भुत ....

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  6. फिर देखा
    सिसकता बचपन
    बेपरवाह जवानी
    तडपती ममता
    लाचार बुढ़ापा
    चीख उठा मन
    नहीं रुके
    बहने लगे आंसू...

    यही ज़िंदगी है ..भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  7. स्थितियों पर निर्भर करता है आंसुओं का बहना ...मर्मस्पर्शी भावों से सजी रचना गहरे अर्थ संप्रेषित करती है .....आपका आभार

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  8. छेड़ने पर मूक भी वाचाल हो जाता है दोस्त
    टूटने पर आइना भी काल हो जाता है दोस्त
    मत करो तुम आदमी के खून का इतना हवन
    जलने पर कोयला भी लाल हो जाता है दोस्त

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  9. सबसे पहले हमारे ब्लॉग 'जज़्बात' पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया.........आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...........पहली ही पोस्ट दिल को छू गयी...........बहुत खूब...........आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे|

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  10. बहुत भावपूर्ण एवं मार्मिक प्रस्तुति ! बहुत सुन्दर

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  11. फिर देखा
    सिसकता बचपन
    बेपरवाह जवानी
    तडपती ममता
    लाचार बुढ़ापा
    चीख उठा मन
    नहीं रुके
    बहने लगे आंसू...per sach to yahi hai ki dard rone se kam nahi hoga

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  12. भावमय शब्‍दों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  13. फिर देखा
    सिसकता बचपन
    बेपरवाह जवानी
    तडपती ममता
    लाचार बुढ़ापा
    चीख उठा मन
    नहीं रुके
    बहने लगे आंसू...

    ....बहुत संवेदनशील और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...बहुत सुन्दर

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  14. अति भावपूर्ण ,मार्मिक.प्रस्तुति....

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  15. जब मैं फुर्सत में होता हूँ , पढ़ता हूँ और तहेदिल से इन भावनाओं का शुक्रगुज़ार होता हूँ ....

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  16. बहने लगे आंसू..जिसे समेटना पड़ता है.

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  17. शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

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