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गुरुवार, 8 मई 2014

मेरे नाम...



शब्द भरे भंडार तुम्हारे छोटा सा काम कर दो,
कुछ शब्द अपने कोषागार से मेरे नाम कर दो॥

धूल भरी गर्म आंधियों में चक्रवात सिर पर चढा,
बरसे फ़ुहार पावस सी सावन मेरे नाम कर दो ॥

तुम्हारी राह के कांटे चुन लूंगी पलको से अपनी,
प्यार के कुछ बोल मनभावन मेरे नाम कर दो॥

चढ रही हैं बुलंदियों पे नफ़रतों की आँधियाँ अब,
सीप में छिप जाऊंगी मैं सागर मेरे नाम कर दो॥

प्रेम रहे सदा जहाँ में, लबो पे रहे तराने हरदम,
अपनी एक खूबसूरत सरगम मेरे नाम कर दो॥

प्यास सदियों की रही है लबों पर हरदम हरवक्त,
ये मीना, सागर साकी औ जाम मेरे नाम कर दो॥

गुरुवार, 24 जनवरी 2013

बेटाडीन मांगता अश्वत्थामा...संध्या शर्मा



दुखों से प्यार है, मुझे 
यही कहा था ना तुमने 
और मुझे... 
तुम पर फक्र है
जख्म को सहेजा
वेदनाओं की सीमा से परे 
बगैर पैरासिटामाल के
आंसुओं के समन्दर को 
अपनी आँखों में जगह दी
कितने तूफ़ान उठे 
पर छलकने ना दिया 
कवि ही पढ़ सकता है
आँखों में छिपी वेदना
कैसे समझेगा भला
तुम्हारे माथे के घाव को
कुमकुम का टीका
समझने वाला 
अपने रिसते जख्मों पर
चन्दन का लेप करने वाला
देखो...वह अश्वत्थामा
भटकर रहा है अनवरत
अपने  जख्मों के लिए
बेटाडीन मांगते द्वार-द्वार....
तुम भूलकर भी 
द्वार बंद मत करना 
ना ही उसे इंकार करना
क्योंकि... वह एक बेटाडीन ही है 
जो उसके जख्म भरेगा 
वही तुम्हारे लिए भी लाभकारी होगा ...

बुधवार, 31 अक्टूबर 2012

तुम जो मिल गए हो... संध्या शर्मा

मेरे जीवन का 
हर रंग, हर अहसास
हर महक, हर स्वाद
सिर्फ तुमसे है
कोई वजूद नहीं मेरा
तुम्हारे बिना
मेरी आँखों में
चमकता है
तुम्हारा प्यार
महकती है
तुम्हारी खुशबू से
मन की रजनीगंधा 
रौशन है
तुम्हारी चांदनी से
मेरी हर शाम
तुम्हारा साथ
आशा की रेशमी डोर
तुम्हारा हाथ
मज़बूत विश्वास
हर आहट मुझ तक
तुमसे होकर आती है
इतना ही  जानता है
मेरा कोमल मन
तुमसे मिला अपनापन
न्योछावर है तुमपर
मेरा सर्वस्व
समर्पित है तुम्हे
सारा जीवन..... 

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

मेरे गीतों का आधार... संध्या शर्मा


क्या बिना अभिव्यक्ति के

प्यार प्यार नहीं होता

क्यों इतना मुश्किल है

प्रेम को दर्शाना

क्यों न अंतर में

इस प्रेम को जियें

आखों से कहें

आँखों की सुनें...





आँचल उड़ा

नभ से बादल गिरा

आह छन गई

प्रीत बन गई

भावनाएं गहरी

अबीर बन गई

गीत बरसे

स्वर झनझनाने लगे

बिन बाती, तेल

दीप जगमगाने लगे...






जब तेरा है साथ  

मन में विश्वास है

मेरे गीतों को

आधार है तेरा 

बिन तेरे जीवन

निराधार है मेरा 

जैसे पराग फूलों का

श्रंगार है घनेरा

आएगा कभी

फ़िर नया सवेरा...

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