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शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

एक बूँद ज़िन्दगी... संध्या शर्मा


एक आंधी का इंतज़ार है 
एक तूफ़ान की ख्वाहिश है
झुकी आँखें राह तकती हैं
धुंध है, ओस बिखरी सी है
आँखों में कुछ नमीं सी है
बीते पल की भीनी खुशबू
पलकों पर बूँद बनकर
आज थमी - थमी सी है
वक़्त ने सिफारिश की है
ख़ुशी हासिल करने की
एक आजमाइश सी है
दो बूँद भी तो काफी हैं
एक जिंदगी के लिए
एक तुम बरसा दो
एक मैं छलका दूँ ....

बुधवार, 31 अक्टूबर 2012

तुम जो मिल गए हो... संध्या शर्मा

मेरे जीवन का 
हर रंग, हर अहसास
हर महक, हर स्वाद
सिर्फ तुमसे है
कोई वजूद नहीं मेरा
तुम्हारे बिना
मेरी आँखों में
चमकता है
तुम्हारा प्यार
महकती है
तुम्हारी खुशबू से
मन की रजनीगंधा 
रौशन है
तुम्हारी चांदनी से
मेरी हर शाम
तुम्हारा साथ
आशा की रेशमी डोर
तुम्हारा हाथ
मज़बूत विश्वास
हर आहट मुझ तक
तुमसे होकर आती है
इतना ही  जानता है
मेरा कोमल मन
तुमसे मिला अपनापन
न्योछावर है तुमपर
मेरा सर्वस्व
समर्पित है तुम्हे
सारा जीवन..... 

सोमवार, 4 जून 2012

यादें...संध्या शर्मा



आज मिले फुर्सत के कुछ पल,
बक्सों में बंद यादों संग हो ली.

जीर्ण होती एक-एक परत,
बड़े ही जतन से खोली.

मैंने इनसे कुछ ना कहा,
ये मुझसे जीभर के बोली.

कितनी अकेली थी मैं,
जब ये यादें ना थीं.

आज जब पड़ा इनसे वास्ता,
लगा यही हैं मंजिल मेरी - यही रास्ता.

मैंने भी बना लिया इन्हें हमराज़,
हर परत में संजो कर अपना आज.

एक दिन ये खुशबू की तरह फैलेगी,
आज मौन है कल खूब बोलेगी.