शुक्रवार, 20 मई 2011

प्रलय.......... संध्या शर्मा

 
सुना है प्रलय आएगा,
तो क्या....?
कोई ज्वालामुखी फटेगा,
या तूफ़ान आयेगा,
या कोई बाढ़ या अकाल,
काल के गाल की तरह,
इस धरती को निगल जायेगा.....?

संवेदनहीनता,
विकृत मानसिकता,
मजबूर संस्कृति,
नाकाम सभ्यता,
मानव से बिछड़ी मानवता,
प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?

 

33 टिप्‍पणियां:

  1. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?

    विचारोत्तेजक पंक्तियाँ....... सच कहा आपने यह प्रलय ही तो है...

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  2. बहुत खूब! बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..

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  3. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?is pralay ko log nahi dekh paa rahe

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  4. jo ho raha hain aajkal usse bada pralay ab aur kya aayega
    antim 4 line superb hain

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  5. बिलकुल सही बात कही आपने-

    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?

    सादर

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  6. सार्थक प्रश्न ..

    संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?

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  7. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?
    .....बिलकुल सही बात कही आपने संध्या जी

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  8. सार्थक प्रश्न अद्भुत सुन्दर रचना! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है!

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  9. सही कहा है.
    प्रलय सी उथल पुथल तो नित्य मनाव मन में होती है.
    वह नित्य ही प्रलय का सामना करता है और जिजीविषा के लिए.

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  10. प्रलय का सुंदर विश्लेषण। मुझे भी लगता है कि जो विकृतियां बढ रही हैं वो प्रलय से कहीं ज्यादा भयावह है।

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  11. Mam bilkul sahi kaha apne. Is parlya ko koi nahi dekh paa raha hai. . . . . . Jai hind jai bharat

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  12. बात तो आपने बिल्कुल सही कही है।

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  13. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?

    इतने प्रलय में एक प्रलय और सही |
    बेहतरीन कटाक्ष |

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  14. विचारणीय और सार्थक प्रश्न उठाती बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  15. बहुत सशक्त अभिव्यक्ति!
    मगर प्रलय तो आया ही नहीं!

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  16. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?

    क्या बात कही है आपने।

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  17. हम रोज एक प्रलय महसूस करते हैं
    नव सृजन के लिये यह तो बहुत ज़रूरी भी है न
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?
    वाह
    सही कहा

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  18. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?


    सटीक अभिव्यक्ति .....सार्थक विचार ....आपका आभार

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  19. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?such kahaa he.hme roj aese pralay se do char hena pdhta haae

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  20. सही में. अपनी अपनी नज़र नज़र की बात है.

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  21. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता

    प्रलय ही तो हैं

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  22. i agree with you.
    lack of humanity is the real disaster on this earth.

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  23. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है!
    http://seawave-babli.blogspot.com

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  24. संवेदनहीनता,
    विकृत मानसिकता,
    मजबूर संस्कृति,
    नाकाम सभ्यता,
    मानव से बिछड़ी मानवता,
    प्रलय नहीं तो क्या हैं .....?


    haan maaan liya pralay aane hi wala hai!1
    bahut bakhubi se racha..

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  25. टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!

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  26. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना|धन्यवाद|

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  27. मानसिक और कलह यही है .यह कलह -प्रियाओं और कलह -प्रेमियों का दौर है .विकृतियों का दौर है यह .बचके रहिये दोस्तों .यहाँ फिसलन बहुत है दोस्तों !

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  28. sarthak lekhan.

    sahee sawal kartee sashakt rachana.

    aabhar

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  29. आप सबका ह्रदय से आभार.. आपने मुझे प्रोत्साहित किया ...यूँ ही अपना मार्गदर्शन देते रहिये ताकि और भी प्रगति कर पाऊं ...आप सबका धन्यवाद..........

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