अधपके बालों के बीच
दर्द भरा निस्तेज चेहरा
निढाल, बेहाल
निढाल, बेहाल
जैसे गिन रहा हो अपनी ही
सांसों का आना-जाना
ज्वर की तपन से तप्त
सांसों का आना-जाना
ज्वर की तपन से तप्त
रग-रग में दौड़ती थकान
दिनभर की भाग-दौड़ से
दिनभर की भाग-दौड़ से
चूर-चूर मज़बूर
व्याकुल शरीर
व्याकुल शरीर
कब से जुटा रहा है
थोड़ी सी हिम्मत
उठे जाकर ला सके
एक गिलास पानी
सूखते गले को
मिले थोड़ी राहत
और निगल सके
बुखार की दवा
कांपती उंगलियाँ
लड़खड़ाते पाँव
साथ नहीं देते
उसी वक़्त अचानक
गूंजी एक रौबदार आवाज़
रामू एक गिलास पानी ला
अगले ही पल चल पड़ी
वह चलती फिरती लाश
ओढ़कर गरीबी का कफ़न
बुझाने पराई प्यास....
उठे जाकर ला सके
एक गिलास पानी
सूखते गले को
मिले थोड़ी राहत
और निगल सके
बुखार की दवा
कांपती उंगलियाँ
लड़खड़ाते पाँव
साथ नहीं देते
उसी वक़्त अचानक
गूंजी एक रौबदार आवाज़
रामू एक गिलास पानी ला
अगले ही पल चल पड़ी
वह चलती फिरती लाश
ओढ़कर गरीबी का कफ़न
बुझाने पराई प्यास....


