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शनिवार, 15 मार्च 2014

बिरज में होली रे कन्हाई …



बिरज में आज होली रे भाई 
सखियों संग नाचे रे राधिका
खेलत फाग अबीर हिलमिल 
ग्वालन संग  कुवंर कन्हाई
बिरज में आज होली रे भाई …

बाजत ताल मृदंग झांझ डफ
मंजीरा संग गुंजत शहनाई
उड़त गुलाल लाल भए बदरा
भई केसर रंग की छिड़काई
बिरज में आज होली रे भाई …

अबीर गुलाल हाथ पिचकारी 
गोपियाँ केसर रंग घोल लाईं 
पड़ गओ पाला रे नंदलाल से
झमकत टेसू रंग अबीर उड़ाई
बिरज में आज होली रे भाई …

लाल हरा गुलाबी रे सतरंगी 
नव कुसुम नव पल्लव फूले 
मुस्कावे मुख निरख-निरख
कैसे न होवे फ़िर यहाँ ढिठाई 
बिरज में आज होली रे भाई … 

इत भीजे पीलो पीताम्बर 
उत भीजे नवरंगी लहंगा 
धनक पहन फिरे लहरिया 
मानो इंदर ने झड़ी लगाई
बिरज में आज होली रे भाई …

श्याम रंग में रंगो वृंदावन
भेदभाव के टूटे सारे बंधन 
झूमें न्यारो अम्बर घन घन 
दुवार दुवार पे बजत बधाई
बिरज में होली खेले कन्हाई …

आपको और आपके परिवार को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं

मंगलवार, 26 मार्च 2013

होली... संध्या शर्मा

होली के रंग आपके जीवन को नए हर्ष और उल्लास से भर दें. होली की बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनायें ....
(होली खेलें लेकिन जीवन दायिनी अमृत रुपी
जल की हर बूंद का महत्त्व समझें) 




मुट्ठी में रंग
मन में उमंग
कान्हा का प्यार
भीजे सिंगार 
मुरली की तान
ग्वालों का गान
मोहे सुन बावरिया होवन दे,
कान्हा संग होली खेलन दे... 

नीरज फुहार
आनंद अपार
उड़े अबीर गुलाल
अवनि आकाश लाल
गुंजन की माल
मयूर पंख भाल
मोहे श्याम रंग में रंगने दे,
कान्हा संग होली खेलन दे... 

देखो धूम मची
गोपियाँ नाच उठी 
रंगों की कली
खिली गली-गली
फैली सुगंध
बोले बाजूबंद
मोहे रंग केसर को घोलन दे,
कान्हा संग होली खेलन दे...