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रविवार, 14 अगस्त 2016

आज़ादी....!



एक बात कहूँ..?
खरीदोगे तो
अपमान करोगे
सड़कों पर फेंकोगे
न खरीदोगे तो
नन्हे मज़दूरों का
साल भर का 
इन्तज़ार व्यर्थ
चलो मान लिया
तुम मना लोगे 
इनके बनाए हुए
झंडे बिना आज़ादी
क्या है कोई हल...?
जो पूरा कर दे इनके
छोटे - छोटे सपने
जो दिला सके इन्हें
भूख और गरीबी से
आज़ादी....!

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

लहराओ तिरंगा...

स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें.....
 
देश का मुकुट हिमालय, सागर माथा अति पावन
गंगा जमना की धरती ये, संस्कृति लोक लुभावन
पुरवाई से महकती माटी,चंदन गंध सी मनभावन
सागर चरण पखारे इसके,झूम झूम के गाता सावन
रंग बिरंगे फ़ूल खिलते हैं,ॠषियों की धरती पावन
वीरों ने धूल चटाई सब को,काल यवन हो या रावन
जन्मे राम कृष्ण हैं यहाँ, धरती है यह अति पावन
अंग्रेजों की घोर गुलामी से, लड़ के आजादी पाई
देश धर्म रक्षा खातिर, वीर शहीदों ने जान गंवाई
स्वतंत्र हुए हम भारत वासी मिल जुल पर्व मनाओ
हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई मिलके तिरंगा लहराओ
देश का मुकुट हिमालय, सागर माथा अति पावन
गंगा जमना की धरती ये, संस्कृति लोक लुभावन

शनिवार, 4 मई 2013

जय हिन्द.... संध्या शर्मा

टूट चुका बाँध  
तबाही मची है
सब कुछ बह गया
कब तक सहोगे
अन्याय - अत्याचार
स्वाभिमान पर प्रहार
प्रतीक्षा कैसी??? 


पानी के बुलबुलों के आगे
तुम गंगा की जलधार
क्यों न तोड़ दो???
अपने धैर्य का बाँध
बह जाने दो टूटकर
एक बची-खुची सी
सिंद्धांत विहीन दीवार!!!!