ठसाठस भरा अस्त-व्यस्त था मन का कमरा आज समय मिला नए - पुराने विचारों- भावों रिश्ते-नातों यादों-अहसासों को झाड़-पोंछ करीने से सहेजा कुछ टीसती यादों को बुहार बाहर किया खाली पड़े फूलदान में महकते अहसासों को सजाया बहुत जगह बन गई है नयी उलझनों-सुलझनो को दो पल सुस्ताने के लिए...