मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

जीवन राग....

उर की अनंत गहराइयों में 
बिन खाद पानी के जन्मे 
बीज होते है स्वप्न
जब बीज है तो पनपेगा
फूलेगा फलेगा 
और आकार लेगा 
विशाल वृक्ष का
जब वृक्ष होगा 
तो घोंसले भी होंगे
जब घोंसले होंगे
चहकेंगें फुदकेंगे पंछी
होगा कलरव गान 
स्वप्न तो स्वप्न होते हैं
परिश्रम और कर्म से सींच
लहलहाना होगा इन्हें 
यदि यथार्थ में सुनना है 
इन पंछियों का खुशियों भरा 
लुभावना जीवन राग...

11 टिप्‍पणियां:

  1. "परिश्रम और कर्म से सींच ....बेहतरीन

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  2. सच में स्वप्न पूरे करने के लिए परिश्रम तो करना ही होगा..बहुत सुन्दर प्रस्तुति ..

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  3. सौ फी सदी सच कहा है ... स्वप्न देखने से ही कुछ नहीं होता ... उनको पोसना होता है ... पालन करना पढता है उनका मेहनत से ... पसीना बहाना होता है उन्हें साकार करने को ... सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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  4. .बहुत सुन्दर प्रस्तुति ..

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  5. वाह, वाह, बहुत खुूब। बेहद सुंदर रचना।

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  6. वाह, वाह, बहुत खुूब। बेहद सुंदर रचना।

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  7. .उर की अनंत गहराइयों में
    bht hi sashakt bhav

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  8. सचमुच..स्वप्नों को साकार तो स्वयं ही करना होगा..

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  9. सुन्दर रचना मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

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