बुधवार, 17 अप्रैल 2013

सदा नीरा ...संध्या शर्मा


ना कोई डोर/
नातों की
ना कोई बंधन/
वादों का
फिर भी...
साथ चलते जाना
सदा नीरा के सिमटने से
मिलन का अहसास
पास होकर भी दूर होना
दो किनारे हैं...
तो क्या हुआ ???
अथाह है प्रेम पराकाष्ठा
तय है एक दिन
समन्दर होना....

32 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...
    तय है एक दिन
    समन्दर होना....
    बहुत सुन्दर!!!
    सस्नेह
    अनु

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  2. नदी का सागर से मिलन और उसे एहसास भी की एक दिन सागर होना है, बढिया। यह लागु प्रकृति के साथ सभी जीव-जंतुओं के लिए भी होता है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष आपकी कविता में भी आ रहा है संध्या जी। हर इंसान का प्रेम सीमटे नहीं संमुदर की तरह व्यापक और विस्तृत बनने का भाव मूल्यवान है।

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  3. तय है एक दिन

    समन्‍दर होना....
    बहुत खूब कहा आपने .... बेहतरीन अभिव्‍यक्ति

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  4. बहुत सुंदर .... साथ साथ एक ही मंज़िल को पाना ....

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  5. संयम की, प्रेम की पराकाष्ठा ...
    लाजवाब अभिव्यक्ति ....

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  6. प्रेम की अति सुन्दर अभिव्यक्ति...
    बेहतरीन...
    :-)

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  7. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.in/

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  8. सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

    आप की ये रचना 19-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

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  9. वादों का
    फिर भी...
    साथ चलते जाना
    सदा नीरा के सिमटने से
    मिलन का अहसास
    ..........बहुत शानदार पंक्तियाँ बहुत बढ़िया दीदी

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  10. संयम और प्रेम की पराकाष्टा |
    सुन्दर भाव लिए रचना |
    आशा

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  11. अथाह है प्रेम पराकाष्ठा
    तय है एक दिन
    समन्दर होना....
    ये तीन पंक्तियाँ रचना को विशिष्टता प्रदान कर रही हैं शानदार प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई|

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  12. अथाह है प्रेम पराकाष्ठा
    तय है एक दिन
    समन्दर होना....
    बहुत शानदार

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  13. सुंदर भावाभिव्यकति
    "सदा नीरा" सतत प्रवाहमयी नदी।

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  14. अथाह है प्रेम पराकाष्ठा
    तय है एक दिन
    समन्दर होना....

    गजब का विश्वास और गहरापन आस्था लिए .......

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  15. बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति!!
    पधारें बेटियाँ ...

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  16. तय है एक दिन...पर वह एक दिन हमें ही लाना होगा...

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  17. फिर भी...
    साथ चलते जाना
    सदा नीरा के सिमटने से
    मिलन का अहसास
    पास होकर भी दूर होना
    दो किनारे हैं...bahut badhiya .....

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  18. अथाह है प्रेम पराकाष्ठा
    तय है एक दिन
    समन्दर होना...बेहतरीन

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  19. संध्या जी, बहुत ही अद्भुत अनुभूति है, जिसे आपने बड़ी सुदंरता से शब्दों में पिरोआ। वैसे भी प्यार हमेशा धैर्य और विश्वास मांगता है। बाकी सब खुद हो जाता है।

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  20. बहुत सुन्दर ***फिर भी...
    साथ चलते जाना
    सदा नीरा के सिमटने से
    मिलन का अहसास
    पास होकर भी दूर होना
    दो किनारे है..

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