शुक्रवार, 29 नवंबर 2013
गुरुवार, 14 नवंबर 2013
गुरुवार, 7 नवंबर 2013
यादें हर सांस में...
यह सोचे बगैर कि
जब कोई सवाल करेगा
निरुत्तर हो जाउंगी
लिख लेती हूं तुम्हारी यादों को
रख लेती हूं संदूक में तह लगा
रेशमी अहसासों को
कि वक़्त की बुरी हवा न लगे कभी
सहेज ली है एक याद आज
इत्र की खूबसूरत सी शीशी में
कि जब भी चाहूँ
तुम बिखर जाओ मेरे जीवन में
खुशबू की तरह
घुल जाओ मेरी हर सांस के साथ
गमक उठे
मन प्राण आत्मा
रोम-रोम पर छाई मधुर गंध
सांसों में घुल जाए
बन जाए
हरियाली जीवन की
अमर हो जाये प्रीत
गगन - धरा सी
धरातल पर.......
गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013
कहो कछु गलत तो नईया ???
अजब जमानो आयो रे भैया
मंहगाई ने कराओ ता थैया
सस्ता मोबाईल मंहगा तेल
चल रओ मनरेगा को खेल
खुद की भर गई सारी जेब
दब गए हैं तुमाए सारे ऐब
सूखे में डूब रही हमाई नैया
अजब जमानो आयो रे भैया
नौ सिलेंडर में काम चलाएं
नहीं चले तो झांझर बजाएं
नई तो न्यारो कर लो चूल्हा
ब्याव कराए बनके दुल्हा
अब काय काट गई ततैया
अब काय काट गई ततैया
परीक्षा लेय रही तुमाई मैया
मंहगाई ने कराओ ता थैया
अजब जमानो आयो रे भैया
हमाई बिनति सुन लो दाता
हमाओ सदाई है तुमसे नाता
चाहे रखो भिखारी हमको
चाहे तुम कर देवो धनवान
मध्यम श्रेणी में ना रखिओ
तुम दयालू हो किरपा निधान
नई तो हो जाहे हाय दैया दैया
अजब जमानो आयो रे भैया
नेता तुमाई तो चाँदी चाँदी
नौकर चाकर रक्षक बाँदी
कितनई बड़ो घोटालो करो
सात पीढी को माल घर भरो
काटो थोड़े दिन की जेल
कछु दिन मे हो जाहे बेल
सब खेल करावे है रुपैया
अजब जमानो आयो रे भैया
खुद के बाल बिदेश पठाए
वे सब अंग्रेजी में रोवे गाए
तुम सदा के चार सौ बीसी
लुगाई ने लगा लई बत्तीसी
देशी घोड़ी चले पूरबी चाल
जनता को अंदर करो माल
लूटो कह हिन्दी मोरी मैया
कहो कछु गलत तो नईया???
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