आई बरखा गूँजने लगा बूंदों का संगीत भीगने लगा अलसाया मौसम पहली फुहार के स्वागत को आतुर पंख पसारे मन मयूर धुल गई पत्ती-पत्ती खिल गई डाली-डाली कोरी धरती पर लिखने वाली है फिर से हरियाली .....
शाम अभी ढली नही सुबह अभी हुई नही आओ करें इंतज़ार गुनगुनी सी धूप में ठंडी-ठंडी बयार का ढलती हुई शाम का धुंधली सी सुबह का रूठी सी चांदनी में खोये से चाँद का फूलों के मौसम में झूमती बहार का...