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सोमवार, 20 दिसंबर 2010
"KHWAAB" ख़्वाब
ख़्वाब ...
बंद पलकों में,
सजते हैं,
मुस्कुराते हैं....
खुली आँखें तो,
टूटते हैं,
बिखर जाते हैं......
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