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शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

"POORA SWAPNA TERA HO"

"पूरा स्वप्न तेरा हो"
मेरी गोद से उतरकर अब तू ,
इस धरती पर चलना सीख.
कठिन सही ये राह मगर तू,
गिरकर भी संभलना सीख.
चाँद सितारों की चाहत में,
रूठना और मचलना सीख.
सागर सी शांति धरकर भी,
गर्भ में मोती पालना सीख.
चन्द्र सी दे शीतलता पर,
सूर्य की भांति जलना सीख.
"तपकर इस जीवन पथ पर,
सोना तू खरा हो,
आशीर्वाद है मेरा तुझको,
तू अपने पांव खड़ा हो,
पूरा स्वपन तेरा हो... 
पूरा स्वपन तेरा हो...  


  

गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

"SARDI KI DHOOP"

"सर्दी की धूप"
दूर गगन से आई धूप
आसमान पर छाई धूप
सूरज के आँचल से उड़कर
धरती पर इतराई धूप
हटा घने कोहरे की चादर
चारों  ओर जगमगाई धूप 
आग उगलती गर्मी में ये
सर्दी में मुस्काई धूप
घिर आई जब काली बदली
हौले से शरमाई धूप
सूरज से सबने जोड़ा नाता
ऋतु सुहानी लाई धूप
दूर गगन से आई धूप ............ 

शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

"ASTITVA"

"NANHI SI BOOND OS KI,
CHINTIT HAI APNE ASTITVA KE LIYE"
KAHIN AISA NA HO.....
KHO JAOON IS DHOOL ME,
YA FIR...........
GUM HO JAOON SAGAR KI GAHRAIYON ME KAHIN,
YA FIR.....
UD JAOON DHUYE KI TARAH,
IS DHARTI KI TAPAN SE,

DARTI RAHI, LADTI RAHI,
KHUD APNE HI ASTITVA KE LIYE,

AUR FIR......
DE GAI US CHATAK KE JEEVAN KO EK NAYA ASTITVA,
USKI PYAS ME SAMAKAR,
JO CHINTIT THI APNE HI ASTITVA KE LIYE.